ममता बनर्जी ने नॉर्थ 24 परगना के बनगांव में आयोजित रैली में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि SIR को लेकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा है. बनगांव को मतुआ समुदाय का गढ़ माना जाता है और इसी वजह से ममता ने यहां से अपनी बात को और भी सख्त तरीके से रखा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक SIR पूरा होने में तीन साल लगते हैं और राज्य सरकार ने कभी इसका विरोध नहीं किया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि किसी भी वास्तविक वोटर का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए. ममता का आरोप है कि बीजेपी अपने दफ्तरों में बैठकर सूची को प्रभावित कर रही है. इसी के साथ उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए. उनके अनुसार आयोग का काम निष्पक्ष रहना है, न कि किसी राजनीतिक दल की तरह काम करना.
अपनी बात को और आगे रखते हुए ममता ने कहा कि अगर मतुआ समुदाय के लोग अवैध बताए जा रहे हैं, तो फिर वही वोट हैं जिन्होंने केंद्र में सरकार बनाई. उन्होंने कहा कि यदि मतदाता अवैध हुए तो 2014 में बनी सरकार भी वैध नहीं कही जा सकती. उन्होंने मतुआ समुदाय को भरोसा दिलाया कि वे पूरी तरह वैध मतदाता हैं और किसी को उनके अधिकारों से छेड़छाड़ नहीं करने दी जाएगी.
रैली में ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी उनके खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि उनके हेलीकॉप्टर की उड़ान रोकने की कोशिश की गई ताकि वह बनगांव न पहुंच सकें. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बीजेपी जितनी कोशिश करना चाहे कर ले, लेकिन बंगाल में उन्हें चुनौती नहीं दे पाएगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि बीजेपी ने उनके खिलाफ गलत कदम उठाया, तो वह पूरे भारत में उसकी नींव हिला देंगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले जनता को भ्रमित करने की कोशिशें होंगी. उन्होंने कहा कि लोग पैसा बांटकर खरीदने की कोशिश करेंगे लेकिन बंगाल की जनता समझदार है और पैसे लेकर भी बीजेपी को वोट नहीं देगी.
CAA को लेकर भी ममता ने केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले बीजेपी CAA को मुद्दा बनाती है और धर्म के आधार पर लोगों को फॉर्म भरने को कहती है. उन्होंने चेताया कि CAA फॉर्म भरकर लोग खुद को विदेशी बता रहे हैं और यह उनके खिलाफ जाएगा. उन्होंने कहा कि बंगाल में कई बोलियां हैं लेकिन भाषा बांग्ला ही है. वह बांग्ला में पैदा हुई हैं और अगर बीजेपी चाहे तो उन्हें भी बांग्लादेशी कह सकती है.
ममता ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने सभी धर्मों में एकता और सद्भाव का संदेश दिया है. बीजेपी धर्म के नाम पर समाज को बांट रही है. उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग उनके सम्मान की जगह हैं और जब तक वह मुख्यमंत्री हैं, किसी को भी राज्य से निकालने नहीं देंगी.



















