Iran Protest Execution: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ा पहला फांसी का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय युवक इरफान सुल्तानी को आज, 14 जनवरी 2026 को फांसी दिए जाने की तैयारी की जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ दशकों का सबसे बड़ा जन आंदोलन चल रहा है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह मामला न सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से अहम है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि ईरानी प्रशासन विरोध को दबाने के लिए किस हद तक जा सकता है।
कौन हैं इरफान सुल्तानी?
इरफान सुल्तानी ईरान के फार्दिस इलाके के निवासी थे, जो तेहरान के पश्चिम में कराज शहर के पास स्थित है। उन्हें 8 जनवरी 2026 को कराज में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
परिवार के करीबी सूत्रों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार:
- गिरफ्तारी के महज दो दिन बाद उन्हें मौत की सजा सुना दी गई
- उन्हें किसी वकील से मिलने का मौका नहीं मिला
- न ही उन्हें खुली और निष्पक्ष सुनवाई दी गई
11 जनवरी (सोमवार) को परिवार को सूचित किया गया कि सजा पर 14 जनवरी को अमल किया जाएगा। अधिकारियों ने परिवार को केवल 10 मिनट की मुलाकात की अनुमति दी, जिसे अंतिम मुलाकात बताया गया।
‘खुदा के खिलाफ जंग छेड़ने’ का आरोप
इरफान सुल्तानी पर मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर ईरान के कड़े कानूनों के तहत ‘खुदा के खिलाफ जंग छेड़ने’ (मोहरबेह) का इल्जाम लगाया गया, जो सीधे तौर पर मौत की सजा से जुड़ा अपराध माना जाता है।
परिवार का कहना है कि इरफान कोई संगठित राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वे उन युवाओं में शामिल थे जो देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से नाराज थे।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान इस फांसी को अंजाम देता है तो अमेरिका बहुत सख्त कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की मदद रास्ते में है।
ईरान में यह आंदोलन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ था। शुरुआत में विरोध महंगाई, ईरानी रियाल की भारी गिरावट, जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल के खिलाफ था, लेकिन जल्द ही यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया और सरकार विरोधी नारों में बदल गया।

















