ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध ने शनिवार को एक बेहद दर्दनाक मोड़ ले लिया। ईरान के दक्षिणी प्रांत हरमोजगान के मीनाब शहर में एक प्राइमरी गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है और 45 अन्य लोग घायल हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने यह जानकारी दी।
शुरुआत में मृतकों की संख्या 24 बताई गई थी लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़ता चला गया। मृतकों में अधिकांश वे मासूम छात्राएं हैं जो उस वक्त स्कूल में पढ़ रही थीं जबकि घायलों में शिक्षक और अन्य स्टाफ शामिल हैं।
यह हमला उस बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा है जो इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान के विभिन्न ठिकानों पर शुरू किया। मीनाब शहर में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड की एक यूनिट तैनात है जिसे संभवतः निशाना बनाया गया था लेकिन मिसाइल सीधे स्कूल पर जा गिरी और निर्दोष बच्चियों की जान ले ली। ईरानी अधिकारियों ने इसे नागरिकों पर क्रूर हमला करार दिया है। अमेरिका या इजरायल की ओर से अब तक इस घटना पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है।
इस हमले की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आक्रोश फैल गया। स्कूल जैसी नागरिक संरचना पर हमला अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों का सीधा उल्लंघन माना जाता है और इसीलिए दुनियाभर के देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र से भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई जा रही है। इस घटना ने उन लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं जो पहले से इस युद्ध के नागरिकों पर पड़ने वाले असर को लेकर आवाज उठा रहे थे।
ईरान ने किया जवाबी हमला
इस बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा हो गया है। तेहरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई के कार्यालय के आसपास भी हमले हुए हैं और धुआं उठता देखा गया। लेकिन खामेनेई की स्थिति को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे अभियान को मेजर कॉम्बेट ऑपरेशंस करार दिया और ईरानी जनता से अपने शासन के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की।
यह संघर्ष ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव का नतीजा है। ईरान पहले से आर्थिक संकट और घरेलू असंतोष से जूझ रहा था और अब इन हमलों ने देश में और अधिक अस्थिरता पैदा कर दी है। मीनाब के स्कूल पर हुए इस हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है और यह सवाल उठ रहा है कि इस युद्ध में निर्दोष नागरिकों खासकर बच्चों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा।


















