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Thursday, January 15, 2026
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रेलवे का नया लोअर बर्थ नियम: अब किसे मिलेगा नीचे वाली सीट, जानिए पूरी व्यवस्था

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भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट बुकिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया को और आसान बनाने पर काम कर रहा है। इसी साल रेलवे ने RailOne नाम का सुपर ऐप लॉन्च किया था, जिसके जरिए यात्री आरक्षित के साथ-साथ अनारक्षित टिकट भी बुक कर सकते हैं और ट्रेन सेवाओं से जुड़ी कई सुविधाएं एक जगह प्राप्त कर सकते हैं।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान कई बार यात्री लोअर बर्थ का विकल्प चुनते हैं, लेकिन सीट किसी अन्य बर्थ पर मिल जाती है। इसको लेकर रेलवे ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटरीकृत रिजर्वेशन सिस्टम में लोअर बर्थ को प्राथमिकता वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं को दी जाती है। हालांकि यह सीट उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

रेलवे ने यह भी प्रावधान रखा है कि यदि टिकट बुकिंग के समय लोअर बर्थ उपलब्ध न हो और पात्र यात्री को कोई ऊपरी सीट मिल जाए, तो ट्रेन में टीटीई यात्रा के दौरान खाली होने पर लोअर बर्थ आवंटित कर सकता है।

ऑनलाइन बुकिंग करते समय यात्रियों के पास यह विकल्प भी होता है कि वे केवल तब ही टिकट बुक कराएं जब लोअर बर्थ उपलब्ध हो। इस विकल्प को चुनने पर यदि लोअर बर्थ नहीं है तो टिकट बुक ही नहीं होगा।

रेलवे नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक अपनी आरक्षित बर्थ पर सोने का समय निर्धारित है। दिन में सीट पर सभी यात्रियों के बैठने की व्यवस्था रहती है। RAC टिकट वाले यात्री दिन में बैठने के लिए साझा सीट का उपयोग करेंगे, लेकिन रात में लोअर बर्थ का अधिकार उसी यात्री को होगा जिसके नाम पर वह बर्थ है।

इसके अलावा रेलवे ने आरक्षित टिकटों की अग्रिम बुकिंग अवधि 120 दिनों की जगह 60 दिन कर दी है। यानी अब यात्री यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकेंगे।

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