भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हाल में हुए अहम समझौतों ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इस सप्ताह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत दौरे पर आए थे। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने कई बड़े फैसले लिए।
सबसे अहम घोषणा दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को लेकर हुई। इसके साथ ही भारत और यूएई ने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया। माना जा रहा है कि यह समझौते क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत और यूएई के बीच कुल पांच दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को लेकर प्रतिबद्धता रही। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ महीने पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अपने रक्षा सहयोग को मजबूत करने को लेकर साझेदारी की थी। उस समझौते में एक देश पर हमला होने की स्थिति में दूसरे के समर्थन की बात कही गई थी।
इस समझौते से पाकिस्तान को लग सकती है मिर्ची
प्रधानमंत्री मोदी और यूएई राष्ट्रपति की बातचीत सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने यमन की स्थिति पर भी चर्चा की। यही वह मुद्दा है, जिस पर सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में हाल के वर्षों में दूरी देखी गई है। इसके अलावा गाजा और ईरान से जुड़े हालात पर भी विचार-विमर्श हुआ।
रक्षा साझेदारी के तहत भारत और यूएई रक्षा उद्योग, उन्नत तकनीक, साइबर प्रशिक्षण, विशेष सैन्य अभियानों और आतंकवाद रोधी सहयोग पर साथ काम करेंगे। दोनों देशों ने परमाणु क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई है। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टर, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन, रखरखाव और सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं।
इसी दौरान ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ। इसके तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड 2028 से शुरू होने वाले दस वर्षों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी खरीदेगी। इस समझौते के बाद भारत अबू धाबी का सबसे बड़ा एलएनजी ग्राहक बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। इससे मध्य पूर्व में नए सैन्य गुट की चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान नाटो की तर्ज पर एक इस्लामिक नाटो की कल्पना भी करता रहा है। वहीं सऊदी अरब और यूएई, जो लंबे समय तक करीबी साझेदार रहे, अब यमन और सूडान जैसे मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत-यूएई की नजदीकी को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


















