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Wednesday, March 25, 2026
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India-EU FTA Deal Impact: क्या लैंड रोवर डिफेंडर सच में सस्ती होगी, समझिए पूरा गणित

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India-EU FTA Deal Impact: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) फाइनल होने के बाद ऑटो सेक्टर में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा चर्चा दमदार लग्जरी एसयूवी लैंड रोवर डिफेंडर को लेकर है। सवाल यही है कि क्या इस डील के बाद भारत में डिफेंडर की कीमतों में वाकई बड़ी कटौती देखने को मिलेगी या यह सिर्फ कयास ही रह जाएंगे।

दरअसल, भारत-यूके एफटीए के वक्त भी डिफेंडर के सस्ते होने की चर्चा चली थी, लेकिन तब कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसकी वजह साफ थी। डिफेंडर यूनाइटेड किंगडम में नहीं, बल्कि स्लोवाकिया में बनती है। इसलिए यूके के साथ हुए समझौते का फायदा इसे नहीं मिल पाया। अब भारत-ईयू एफटीए के बाद पहली बार ऐसा मौका आया है, जब डिफेंडर पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने की संभावना बनी है।

नए एफटीए के तहत पूरी तरह बनी हुई गाड़ियों यानी CBU मॉडल्स पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती का प्रावधान किया गया है। लैंड रोवर डिफेंडर भारत में CBU के तौर पर ही आती है। इसी वजह से यह एसयूवी इस डील की सबसे बड़ी लाभार्थी मानी जा रही है। फिलहाल डिफेंडर पर करीब 110 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, जो इसकी कीमत को काफी ऊपर ले जाती है।

अगर मौजूदा कीमतों की बात करें तो भारत में डिफेंडर 110 की एक्स-शोरूम कीमत करीब 1.03 करोड़ रुपये है। इसकी बेस कॉस्ट एंड फ्रेट लगभग 35 लाख रुपये मानी जाती है। इस पर 110 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी करीब 38.5 लाख रुपये बैठती है और फिर पूरी रकम पर करीब 40 फीसदी जीएसटी लगता है। यही वजह है कि कीमत 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाती है।

FTA के तहत अगर इंपोर्ट ड्यूटी घटकर 40 फीसदी हो जाती है, तो डिफेंडर की एक्स-शोरूम कीमत घटकर करीब 68.6 लाख रुपये तक आ सकती है। वहीं, अंतिम चरण में जब ड्यूटी 10 फीसदी तक लाई जाएगी, तब इसकी कीमत लगभग 53.9 लाख रुपये के आसपास आ सकती है। यह कटौती बड़ी जरूर है, लेकिन पूरी तरह से गेम-चेंजर नहीं।

इसके बावजूद डिफेंडर पूरी तरह से टोयोटा फॉर्च्यूनर जितनी सस्ती नहीं होगी। फिलहाल फॉर्च्यूनर की कीमतें 34.16 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल में 49.59 लाख रुपये तक जाती हैं। यानी 10 फीसदी टैरिफ के बाद भी डिफेंडर थोड़ी महंगी ही रहेगी।

सबसे अहम बात यह है कि यह टैक्स कटौती एकदम से लागू नहीं होगी। इंपोर्ट ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा। इसके अलावा, यह फायदा सिर्फ शुरुआती 2.5 लाख इंपोर्टेड कारों तक सीमित रहेगा और केवल CBU मॉडल्स को ही मिलेगा। इंडिया-ईयू एफटीए को पूरी तरह लागू होने में एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में डिफेंडर की नई कीमतों का असली असर 2028 के आसपास ही देखने को मिलने की उम्मीद है।

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