भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल फाइटर जेट की भूमिका के बाद केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना का भरोसा इस विमान पर और मजबूत हुआ है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 114 नए राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दे दी गई है। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।
बैठक में केवल राफेल पर ही नहीं बल्कि अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों पर भी चर्चा हुई। फ्रांस से स्कैल्प क्रूज मिसाइल की खरीद, अमेरिका से पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और भारत की बहुप्रतीक्षित परियोजना सुदर्शन रक्षा कवच के लिए एस-400 सिस्टम जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एक लाख विभव प्वाइंट एंटी टैंक माइंस को मंजूरी देने की संभावना जताई गई है।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल फाइटर जेट तैनात हैं। इन विमानों ने पिछले अभियानों में अपनी क्षमता साबित की है। वायुसेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रन की कमी की ओर ध्यान दिलाती रही है। ऐसे में 114 नए मल्टीरोल फाइटर जेट की खरीद से इस कमी को काफी हद तक दूर करने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के अनुसार नए राफेल जेट्स के साथ बड़ी संख्या में स्कैल्प क्रूज मिसाइल भी खरीदी जाएंगी। ये लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने में सक्षम मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और दुश्मन के ठिकानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाया जा सकेगा।
फ्रांस के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के समानांतर भारत ने अमेरिका के साथ भी अपने संबंध मजबूत किए हैं। रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में अमेरिका से करीब 3 अरब डॉलर की रक्षा खरीद पर सहमति बनने की संभावना जताई गई है। इसमें छह पी-8आई समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमानों की खरीद का प्रस्ताव शामिल है।
यह डील न केवल भारत की वायु शक्ति को मजबूत करेगी बल्कि रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर रक्षा खरीद भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा रही है।


















