मध्य प्रदेश में एक बड़ी संख्या में वोटरों के वोटर लिस्ट से नाम हटने की कगार पर हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार झा के मुताबिक, राज्य में हुई एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 42.74 लाख वोटरों ने फॉर्म जमा नहीं किए। जांच में पाया गया कि इनमें से 8.46 लाख वोटरों की मृत्यु हो चुकी है। 31.51 लाख वोटर अपने दर्ज पते पर नहीं मिले और 2.77 लाख वोटरों के नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे।
क्या है एसआईआर प्रक्रिया?
चुनाव आयोग ने पिछले साल 4 नवंबर को देश के 12 राज्यों में एसआईआर की शुरुआत की थी। इसका मकसद वोटर लिस्ट को फिर से व्यवस्थित करना था, ताकि हर योग्य नागरिक का नाम दर्ज हो और गलत या मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जा सके। एमपी में यह प्रक्रिया 65,014 पोलिंग स्टेशनों पर पूरी की गई।
किसके नाम पर है खतरा और क्यों?
राज्य के कुल 5.74 करोड़ वोटरों में से करीब 5.31 करोड़ लोगों ने अपने फॉर्म जमा कर दिए हैं। बचे हुए 42.74 लाख वोटरों से जुड़े आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
- 8.46 लाख वोटर दिवंगत पाए गए।
- 31.51 लाख वोटर अपने दिए गए पते पर नहीं मिले।
- 2.77 लाख वोटरों के नाम एक से ज्यादी बूथ पर दर्ज मिले।
चुनाव आयोग का नया नियम है कि अब हर वोटर का नाम सिर्फ एक ही बूथ पर रहेगा। इन सभी कारणों से इन 42.74 लाख नामों को वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है।
22 जनवरी तक है अपना नाम जुड़वाने का मौका
चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर को जारी ड्रॉफ्ट लिस्ट में लोगों को बड़ी राहत दी है। अगर किसी योग्य नागरिक का नाम गलती से छूट गया है या हटाया जाने वाला है तो वह 22 जनवरी 2026 तक अपना दावा पेश कर सकता है और अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करा सकता है। ऐसा कोई भी व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट या सीधे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने अपनी बात रख सकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी सूचना के किसी का भी नाम नहीं काटा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद एक पारदर्शी और सही वोटर लिस्ट बनाना है, ताकि कोई भी योग्य मतदाता वोट डालने के अधिकार से वंचित न रह जाए।


















