बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में आयोजित नवग्रह शक्ति पीठ प्रतिष्ठा महोत्सव में एक बार फिर अपने तीखे और चर्चित अंदाज में बयान दिया। कथा के दौरान उन्होंने लड़कियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे दुर्गा बनें, काली बनें, त्रिपुर सुंदरी बनें लेकिन कभी बुर्के वाली न बनें। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर भी यह बात तेजी से फैल गई।
शास्त्री ने इस दौरान संगत के प्रभाव पर भी अपनी बात रखी और कहा कि अक्सर युवा अपनी गलतियों का दोष अपनी संगत पर डालते हैं लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि राम के राज्य में भी मंथरा नहीं सुधरी और रावण के राज्य में विभीषण कभी नहीं बिगड़े। इसका मतलब यह है कि संगत तभी असर करती है जब व्यक्ति के अंदर खुद कोई कमजोरी हो।
युवाओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने सोशल मीडिया की रील संस्कृति पर भी करारा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सफलता इंस्टाग्राम की रील को लाइक करने से नहीं बल्कि रियल लाइफ में मेहनत और पढ़ाई करने से मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि 18 से 25 साल की उम्र किसी भी इंसान की जिंदगी की सबसे अहम उम्र होती है और अगर इस दौरान कोई बिगड़ गया तो फिर सुधरना बेहद मुश्किल हो जाता है।
सत्संग के महत्व को समझाते हुए शास्त्री ने कहा कि केवल कथा सुनने से जीवन नहीं बदलता बल्कि उसे जीवन में उतारने से बदलाव आता है। उन्होंने जलते और बुझे हुए दीपक का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह एक जलते दीपक के पास बुझा दीपक रखने से वह भी जल उठता है उसी तरह सत्संग भी मन के अंधेरे को दूर करता है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी की कृपा उन्हें मानने से नहीं बल्कि उनकी बातों को अपने जीवन में अपनाने से मिलती है।
इस भव्य कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा भी शामिल हुए। अभिनेता आशुतोष राणा ने नवग्रह शक्तिपीठ की वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व की भरपूर सराहना की और इसे मध्य भारत की एक अनूठी धरोहर बताया।
















