Delhi Blast Investigation: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों के हाथ कई बड़े सुराग लग रहे हैं। जांच में अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि धमाके में साधारण नहीं बल्कि हाई ग्रेड मिलिट्री एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल किया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, विस्फोट की तीव्रता और नुकसान देखकर यह साफ है कि यह सामान्य अमोनियम नाइट्रेट जैसा विस्फोटक नहीं था, बल्कि इसमें अत्याधुनिक विस्फोटक सामग्री का प्रयोग हुआ है।
उमर और मुजम्मिल के तुर्किये कनेक्शन से बढ़ा शक
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आतंकी डॉ. उमर नबी और डॉ. मुजम्मिल गनई पहले तुर्किये (Turkey) गए थे, जहां उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के हैंडलर्स से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार, इन आतंकियों की योजना सिर्फ एक कार ब्लास्ट तक सीमित नहीं थी, बल्कि 26/11 की तरह दिल्ली में एक साथ कई जगहों पर धमाके करने की तैयारी थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर मिलिट्री ग्रेड विस्फोटक की पुष्टि होती है तो इसके पीछे पाकिस्तानी सेना की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस स्थिति में भारत सरकार की प्रतिक्रिया भी बेहद गंभीर हो सकती है।
फॉरेंसिक जांच से खुलेगा विस्फोटक का राज
धमाके में इस्तेमाल कार के सभी हिस्सों को मंगलवार देर रात ट्रक में डालकर रोहिणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया। वहां एनआईए (NIA), सीबीआई (CBI) और एफएसएल की टीम मिलकर जांच कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धमाके के बाद जब फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने के लिए पानी का इस्तेमाल किया, तो विस्फोटक में मौजूद केमिकल धुल गए या क्षतिग्रस्त हो गए। यही वजह है कि तीन दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस प्रकार के विस्फोटक का प्रयोग किया गया था।
200 नमूनों की जांच जारी
मौके से लगभग 200 नमूने उठाए गए हैं, जिनमें कार के हिस्सों के अलावा जमीन और आसपास के धातु पदार्थ भी शामिल हैं। सभी नमूनों की जांच एफएसएल और एनआईए लैब में की जा रही है। यदि मिलिट्री ग्रेड विस्फोटक की पुष्टि होती है, तो पाकिस्तानी सेना की सीधी भागीदारी की संभावना और मजबूत हो जाएगी।

















