एक समय था जब बिटकॉइन को डिजिटल सोना कहा जाता था, लेकिन अब यही बिटकॉइन निवेशकों के लिए सिरदर्द बन गया है। गुरुवार को बिटकॉइन 70,000 डॉलर के नीचे गिर गया, जो पिछले करीब 15 महीनों में पहली बार हुआ है। इस गिरावट ने ग्लोबल क्रिप्टो बाजार में डर का माहौल बना दिया है।
अमेरिका के न्यूयॉर्क ट्रेडिंग सेशन के दौरान बिटकॉइन की कीमत 69,821 डॉलर तक फिसल गई। अक्टूबर 2025 में बने अपने ऑल टाइम हाई से अब तक बिटकॉइन करीब 44 प्रतिशत टूट चुका है। यह स्तर आखिरी बार नवंबर 2024 में देखा गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद बाजार में तेजी थी।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल क्रिप्टो बाजार विश्वास के संकट से गुजर रहा है। मोनार्क एसेट मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर शिलियांग टैंग के मुताबिक निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में अलग-अलग क्रिप्टो टोकन में करीब 722 मिलियन डॉलर की बुलिश पोजिशन लिक्विडेट हो चुकी हैं। पहले यह गिरावट केवल क्रिप्टो से जुड़े कारणों तक सीमित थी, लेकिन अब इसका असर वैश्विक शेयर बाजार की कमजोरी से भी जुड़ गया है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भी तेज बिकवाली देखी गई है। नैस्डैक 100 में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई और यूरोपीय बाजारों पर भी पड़ा। इस ग्लोबल सेल ऑफ का सीधा दबाव क्रिप्टो बाजार पर दिख रहा है।
अमेरिका में लिस्टेड बिटकॉइन ईटीएफ से भी निवेशकों की निकासी बढ़ गई है। जहां एक दिन पहले 562 मिलियन डॉलर का इनफ्लो देखा गया था, वहीं अगले दो दिनों में 800 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम बाहर निकल गई। इससे बाजार की कमजोरी और गहरी हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिटकॉइन 72,000 डॉलर के ऊपर खुद को संभाल नहीं पाया, तो यह 68,000 डॉलर या इससे भी नीचे जा सकता है। हालांकि कुछ निवेशक इस गिरावट को सस्ते दाम पर खरीदारी का मौका भी मान रहे हैं।
पिछले एक हफ्ते में पूरे क्रिप्टो बाजार से करीब 460 अरब डॉलर यानी लगभग 4,60,000 करोड़ रुपये की वैल्यू साफ हो चुकी है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या क्रिप्टो का सुनहरा दौर खत्म हो रहा है या यह सिर्फ अगली बड़ी तेजी से पहले की गिरावट है।

















