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Thursday, January 15, 2026
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इंदौर में दूषित पानी का कहर, भागीरथपुरा के बाद अब नए इलाकों तक पहुंचा संकट

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Indore में दूषित पानी से फैल रही बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। भागीरथपुरा त्रासदी के बाद अब मालवीय नगर क्षेत्र की कृष्ण बाग कॉलोनी से भी गंभीर मामले सामने आए हैं। यहां दूषित पानी पीने से छोटे-छोटे बच्चों के बीमार होने की खबरों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

14 माह की दो बच्चियां उल्टी-दस्त से पीड़ित

कृष्ण बाग कॉलोनी में रहने वाली 14 माह की दो बच्चियां सानवी और सिद्धि बीते चार-पांच दिनों से लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत से जूझ रही थीं। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें इंदौर के Chacha Nehru Hospital लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को निजी अस्पताल में रेफर किया गया। फिलहाल इलाज के बाद बच्चियों की स्थिति में आंशिक सुधार बताया जा रहा है।

परिजनों का आरोप: कॉलोनी में कई बच्चे बीमार

बच्ची के पिता चंदन सिंह का कहना है कि केवल उनकी बेटियां ही नहीं, बल्कि कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य बच्चे भी इसी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं। शुरुआत में घरेलू उपचार किया गया, लेकिन दूषित पानी के कारण संक्रमण बढ़ता चला गया। परिजनों ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में सप्लाई किया जा रहा पानी ही बीमारी की मुख्य वजह है।

अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में लगातार ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें उल्टी-दस्त, डायरिया और संक्रमण की शिकायत है। एक अन्य मामले में दूषित पानी से बीमार बच्चे को पहले न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती कराया गया, बाद में सर्जरी के लिए MY Hospital भेजा गया। बच्चे के पिता ने बताया कि निजी अस्पताल में लंबे इलाज के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, जिसके बाद सरकारी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा।

दूषित पानी से अब तक करीब 20 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार को तीन नई मौतों की जानकारी सामने आने के बाद हालात की गंभीरता और बढ़ गई है। नए इलाकों जैसे कृष्ण बाग कॉलोनी से सामने आ रहे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर संदेह

भागीरथपुरा में दर्जनों मौतों और हजारों लोगों के बीमार होने के बावजूद हालात काबू में नहीं आ पाए हैं। नागरिकों का आरोप है कि Indore Municipal Corporation और स्वास्थ्य विभाग के दावे जमीनी स्तर पर असर नहीं दिखा पा रहे। सवाल यह है कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होगी, तब तक और कितने परिवार दूषित पानी की इस लापरवाही की कीमत चुकाने को मजबूर होंगे।

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