मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुनिया का कोई काम किसी की जिंदगी से बड़ा नहीं होता। सड़क पर चलते समय सुरक्षा नियमों का पालन हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होना चाहिए। सीएम ने अपील की — हम सुधरेंगे तो जग भी सुधरेगा।
राज्य स्तरीय कार्यशाला से नई सोच की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सड़क सुरक्षा उपायों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क सुरक्षा प्रबंधन में देश में पाँचवें स्थान पर है, लेकिन समाज और सरकार की संयुक्त भागीदारी से प्रदेश को नंबर वन बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मंथन से निकले सुझाव सड़क सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक धरोहर (long-term legacy) साबित होंगे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सड़कें किसी भी प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की रीढ़ होती हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ कानून या चालान का विषय नहीं, बल्कि यह एक माइंडसेट (mindset) है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने “लोकपथ ऐप (Lokpath App)” बनाया है, जिससे लोग सड़क क्षति या दुर्घटना की जानकारी साझा कर सकते हैं। इस ऐप में ब्लैक स्पॉट अलर्ट सिस्टम भी जोड़ा गया है जो वाहन चालकों को खतरे से पहले सचेत करेगा।
गुणवत्ता और सुरक्षा पर सरकार की नजर
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि हर माह सड़कों की गुणवत्ता जांची जाती है और छोटी सड़कों पर सुरक्षा मानकों का पालन अब विशेषज्ञ एजेंसियों से कराया जाएगा। साइनबोर्ड, रिफ्लेक्टर और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लक्ष्य है — दुर्घटना-मुक्त मध्यप्रदेश (Accident-free Madhya Pradesh) बनाना।
इस मौके पर आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क सुरक्षा में मॉडल राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 93% दुर्घटनाएँ मानवीय त्रुटियों से होती हैं जबकि बाकी सड़क डिज़ाइन या संकेतों की कमी से।
उन्होंने सुझाव दिया कि ब्लैक स्पॉट का डेटा साझा कर हर मोड़ को सुरक्षित (Safe Turns Initiative) बनाया जाए।




















