केंद्रीय बजट 2026 के तहत भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के बजट को लगभग दोगुना कर दिया है। इस योजना के लिए आवंटन 23 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी।
सरकार के इस फैसले से भारतीय घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा और विदेशों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे मेक इन इंडिया अभियान को भी गति मिलने की उम्मीद है।
इस स्कीम का सीधा फायदा स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप, एसी और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण से जुड़ी इंडस्ट्री को मिलेगा। अगर मैन्युफैक्चरर्स को देश में ही सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले कंपोनेंट्स मिलने लगते हैं, तो आने वाले समय में इन प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी राहत देखने को मिल सकती है।

वित्त मंत्री ने बताया कि यह स्कीम अप्रैल 2025 में करीब 22,919 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई थी। लेकिन निवेश प्रस्तावों और इंडस्ट्री की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने इसके बजट को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का फैसला किया है।
अब तक इस योजना के तहत 46 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनसे हजारों करोड़ रुपये का निवेश और बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में वैल्यू एडिशन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए।

















