BMC Election Results: महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मुंबई सहित राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में हुए चुनावों के रुझानों से साफ है कि भारतीय जनता पार्टी ने शहरी राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली है। खास तौर पर बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में बीजेपी पहली बार बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है। नागपुर से लेकर पुणे तक बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के मेयर बनने की तस्वीर लगभग साफ होती जा रही है, जबकि ठाकरे ब्रदर्स की रणनीति और राज ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
बीएमसी चुनाव की मतगणना जारी है और अब तक के रुझानों में बीजेपी करीब 88 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) से कड़ी टक्कर के बाद बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना अपने दम पर बहुमत हासिल करती दिख रही है। मुंबई की राजनीति में मराठी मानुष के नाम पर पहचान बनाने वाले राज ठाकरे का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। न तो मुंबई में उनकी पार्टी को अपेक्षित समर्थन मिला और न ही पुणे जैसे बड़े शहर में कोई राजनीतिक करिश्मा देखने को मिला।
राज्य की 29 नगर महापालिकाओं के चुनावी रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि बीएमसी में बीजेपी गठबंधन को प्रचंड जीत मिल रही है। वहीं, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) दहाई अंक तक भी नहीं पहुंच पाई है। यह स्थिति तब है, जब मनसे ने मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। बीएमसी ही नहीं, बल्कि मुंबई से बाहर के ज्यादातर नगर निगमों में भी मनसे का लगभग सफाया होता दिख रहा है।
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका क्षेत्रों में कुल 2,869 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं। अब तक के रुझानों के अनुसार बीजेपी 1,064 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना 282 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) सिर्फ 109 वार्डों में आगे है। अजित पवार की एनसीपी 113 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि शरद पवार की एनसीपी महज 24 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 222 सीटों पर बढ़त में है, जबकि मनसे सिर्फ 12 सीटों पर आगे है। मुंबई की कुल 277 सीटों में से मनसे को केवल 5 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है।
नगर निगमवार आंकड़ों पर नजर डालें तो राज ठाकरे की पार्टी लगभग सिंगल डिजिट तक सीमित रह गई है। कल्याण-डोंबिवली की 122 सीटों में बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना को बहुमत मिलता दिख रहा है, जबकि मनसे सिर्फ चार सीटों पर आगे है। ठाणे की 131 सीटों में से मनसे केवल एक सीट पर आगे चल रही है। नवी मुंबई की 111 सीटों में भी पार्टी सिर्फ एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। नासिक की 122 सीटों में मनसे दो सीटों पर आगे है, जबकि अहिल्यानगर नगर महापालिका की 68 सीटों में से मनसे के केवल तीन उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। उल्हासनगर नगर महापालिका में भी पार्टी को सिर्फ एक सीट पर बढ़त मिली है।
पुणे नगर निगम चुनाव में भी मनसे का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। पुणे की 165 सीटों में से 122 सीटों पर रुझान आ चुके हैं और वहां मनसे का खाता तक नहीं खुलता दिख रहा है। पुणे के अलावा मीरा-भायंदर, वसई-विरार, भिवंडी, पनवेल, नागपुर, पिंपरी-चिंचवड़, संभाजीनगर, कोल्हापुर, सांगली-मिरज, सोलापुर, मालेगांव, जलगांव, धुले, इचलकरंजी, नांदेड़, परभणी, जलाना, लातूर, अमरावती, अकोला और चंद्रपुर जैसे 22 शहरों में मनसे को एक भी सीट मिलती नजर नहीं आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह नतीजे राज ठाकरे की राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि मनसे ने सभी 29 नगर निगमों में सभी सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारे थे, लेकिन प्रमुख शहरों और पारंपरिक गढ़ में पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी थी। मुंबई बीएमसी के 227 वार्डों में गठबंधन के तहत मनसे ने करीब 20 से 30 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ा, लेकिन नतीजों में पार्टी सिर्फ पांच सीटों पर ही जीत की ओर बढ़ती दिख रही है।


















