केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर पहली बार कब्जा जमाने के बाद भाजपा ने राज्य की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत कर ली है। इस जीत को पार्टी एक बड़े संकेत के तौर पर देख रही है। अब भाजपा की नजर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर टिकी है। संगठन स्तर पर पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
भाजपा आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई राज्यों के लिए चुनाव प्रभारी तय किए जा चुके हैं लेकिन केरल को लेकर पार्टी ने अब तक इंतजार किया था। नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी यहां बड़े रणनीतिक चेहरों को जिम्मेदारी सौंप सकती है। माना जा रहा है कि राज्य में संगठन प्रभारी भी बदले जा सकते हैं।
पार्टी को अब दिख रही है उम्मीद
पार्टी को उम्मीद है कि नगर निगम और कुछ नगरपालिकाओं में मिली सफलता विधानसभा तक रास्ता खोल सकती है। भाजपा की नजर राज्य की करीब आधा दर्जन सीटों पर है जहां वह मजबूत चुनौती पेश कर सकती है। अब तक केरल में भाजपा सिर्फ एक बार विधानसभा सीट जीत पाई है जब नेमम सीट से ओ राजगोपाल विजयी हुए थे। हाल ही में त्रिशूर लोकसभा सीट जीतना भी पार्टी के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला रहा है।
भाजपा अब सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। पार्टी हिंदू समुदाय के साथ-साथ ईसाई समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस और वाम दलों के मुकाबले के बीच भाजपा खुद को मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। राज्य में वामपंथी शासन के खिलाफ असंतोष को भुनाने की रणनीति पर भी काम हो रहा है।
40 साल बाद नगर निगम पर भाजपा का कब्जा
शुक्रवार को केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव तब दिखा जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम में लगभग 40 साल बाद वाम दलों का कब्जा टूटा। भाजपा की यह जीत राज्य की राजनीति के लिए एक नयी मोड़ मानी जा रही है। वहीं कोच्चि, कन्नूर और त्रिशूर नगर निगम में यूडीएफ की महिला पार्षदों ने मेयर पद की शपथ ली। इन नतीजों ने केरल की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है।

















