20.1 C
Indore
Friday, February 20, 2026
Homeबड़ी खबरबिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग, NDA सहयोगियों ने नीतीश...

बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग, NDA सहयोगियों ने नीतीश कुमार पर बढ़ाया दबाव

Date:

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने ही गठबंधन सहयोगियों के भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र में NDA सरकार की वापसी के महज तीन महीने बाद ही सहयोगी दलों ने राज्य में एक दशक से लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठा दी है। इस कानून के कारण अब तक 8 लाख से ज्यादा लोग कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे हैं।

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस बहस को तूल देते हुए कानून की समीक्षा का पुरजोर समर्थन किया है। उन्हें NDA के एक और घटक दल का साथ मिला है। मांझी ने दावा किया कि प्रतिबंध का शिकार ज्यादातर लोग वंचित वर्गों से हैं। यह नीति राज्य को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने इस तरह की मांग की। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक विधायक ने भी कानून की समीक्षा की मांग की है। गया में पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने बुधवार को कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

जहरीली शराब सिर्फ गरीबों को मार रही है – मांझी

उन्होंने सरकार के इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि शराबबंदी तो हो नहीं रही है, होम डिलीवरी हो रही है। समीक्षा की मांग करते हुए मांझी ने बताया कि अदालतों में शराबबंदी से जुड़े 8 लाख से अधिक लंबित मामलों में से 3.5 से 4 लाख मामले अकेले वंचित वर्गों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो बात सबसे ज्यादा चिंताजनक है, वह यह है कि बिहार में मुख्य रूप से जहरीली शराब पहुंच रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार में जहरीली शराब गरीबों को मार रही है। यह शराब सस्ती दर पर उपलब्ध हैं। मांझी ने यह भी कहा कि ऐसी शराब गरीबों की उम्र कम कर रही है और उन्हें बीमारियों का शिकार बना रही है। उन्होंने कहा कि शराब नीति गलत नहीं है, लेकिन इसके लागू करने में खामियां हैं।

मांझी ने साफ किया कि शराबबंदी लागू होनी चाहिए लेकिन इसके कार्यान्वयन में खामियां हैं। इसीलिए हम बार-बार नीतीश को इसकी समीक्षा के बारे में बता रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन अधिकारी गरीब लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं। जबकि जो बड़े पैमाने पर तस्करी करते हैं, उन्हें पैसे लेकर छोड़ दिया जा रहा है।

जदयू ने किया साफ इंकार

JDU ने इस मांग को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि कानून आम सहमति से पारित किया गया था। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने पूछा कि सबसे पहले सभी दल आम सहमति पर पहुंचे और फिर उन्होंने सदन के पटल पर शपथ ली, तो समीक्षा किस बात की? उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी के बाद जनता का विश्वास बढ़ा है और महिलाएं विकास के नए अध्याय लिख रही हैं।

NDA के घटक दलों की इस मांग के बाद अब सबकी निगाहें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर टिकी हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस कानून में किसी भी तरह के संशोधन के लिए तैयार होते हैं या नहीं।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश