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Thursday, January 15, 2026
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बिहार में सम्राट चौधरी को मिला गृह विभाग, कंट्रोल फिर भी सीएम नीतीश के पास

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बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव तब दिखा जब नई एनडीए सरकार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में यह वह मंत्रालय है जिसे सबसे शक्तिशाली माना जाता है। दो दशक में यह पहला मौका है जब जेडीयू ने यह विभाग अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा को सौंपा है। इस फैसले के बाद सम्राट चौधरी की भूमिका और राजनीतिक कद दोनों मजबूत हुए हैं। हालांकि गृह विभाग भाजपा को मिल गया है लेकिन पुलिस और प्रशासनिक नियंत्रण के कुछ अहम अधिकार अभी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास ही हैं।

गृह विभाग भाजपा के पास कंट्रोल फिर भी सीएम के पास प्रशासनिक शक्ति

नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण के बाद शुक्रवार को विभागों का बंटवारा किया गया। नीतीश कुमार ने गृह विभाग सम्राट चौधरी को सौंप दिया लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी अपने पास रखा। जीएडी वह विभाग है जहां से पूरे राज्य के आईएएस आईपीएस बीएएस और बीपीएस अफसरों की नियुक्ति तबादले प्रमोशन और अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होती है। परंपरागत रूप से यह विभाग हमेशा मुख्यमंत्री के पास ही रहा है क्योंकि इससे पूरी सरकारी मशीनरी पर उनका नियंत्रण बना रहता है।

इस संरचना में भले ही गृह विभाग डिप्टी सीएम को दिया गया हो लेकिन किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का तबादला या प्रमोशन तभी होगा जब सीएम इसकी मंजूरी देंगे। यानी गृह विभाग की दैनिक जिम्मेदारियां सम्राट चौधरी संभालेंगे लेकिन रणनीतिक प्रशासनिक नियंत्रण नीतीश कुमार के हाथ में ही रहेगा। यह मॉडल बिहार में लंबे समय से चला आ रहा है और मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इसी ढांचे पर आधारित है।

सीएम नीतीश के पास कौन कौन से विभाग रहेंगे

नीतीश कुमार ने अपने पास सामान्य प्रशासन के साथ कई प्रमुख विभाग भी रखे हैं। इनमें मंत्रिमंडल सचिवालय निगरानी विभाग निर्वाचन विभाग और वे सभी मंत्रालय शामिल हैं जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रमुख प्रशासनिक स्तंभों पर अपनी पकड़ को पहले की तरह कायम रखा है।

नई सरकार के गठन के बाद भाजपा के भीतर यह माना जा रहा है कि गृह विभाग मिलने से सम्राट चौधरी को मजबूत राजनीतिक संकेत मिला है। वहीं जेडीयू समर्थक मानते हैं कि सामान्य प्रशासन विभाग सीएम के पास रहने से संतुलन बना रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नई व्यवस्था आने वाले समय में केंद्र और बिहार सरकार के बीच भी एक अहम संकेत के रूप में देखी जाएगी।

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