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Thursday, January 15, 2026
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Bihar Election 2025: आरजेडी को करारा झटका, तेजस्वी की वापसी की उम्मीद टूटी — शुरुआती रुझानों में NDA 200 पार

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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों ने तस्वीर साफ कर दी है—तेजस्वी यादव की वापसी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। आरजेडी, जो 2020 में 78 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, इस बार सिर्फ 33 सीटों पर आगे है। यह गिरावट तेजस्वी के राजनीतिक करियर के लिए भारी चोट मानी जा रही है।

NDA की जबरदस्त लहर, 200 के पार

जेडीयू इस समय 83 सीटों पर और भाजपा 80 सीटों पर आगे है। सहयोगी लोजपा-आर 22 सीटों, और जीतनराम मांझी की HAM 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। इस तरह एनडीए आसानी से 200+ सीटों की ओर बढ़ रहा है।

इसके उलट महागठबंधन 50 सीटों तक भी नहीं पहुंच पा रहा। यदि यही रुझान नतीजों में बदले तो यह आरजेडी के लिए 2010 जैसी करारी हार होगी, जब वह सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई थी।

कांग्रेस की स्थिति और भी कमजोर दिख रही है। राहुल गांधी ने खुद कैंपेन लीड किया था, लेकिन 62 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी केवल 5 सीटों पर आगे है।

क्यों हारी RJD? पांच बड़े कारण

लालू यादव का प्रचार से दूर रहना

लालू यादव इस बार प्रचार से बाहर रहे। समर्थकों का उत्साह कम हुआ और विरोधी “जंगलराज” का मुद्दा सामने लाते रहे। दोनों ही वजहों ने आरजेडी को नुकसान पहुंचाया।

परिवार में कलह और तेजप्रताप का अलग होना

तेजप्रताप यादव की बगावत ने आरजेडी को भारी नुकसान दिया। वे खुद भी चुनाव हारते दिख रहे हैं। उनकी अलग राह ने वोटों का बंटवारा किया और पार्टी की एकता पर सवाल खड़े किए।

नीतीश–मोदी की जुगलबंदी

एनडीए ने शुरू से ही तालमेल बनाए रखा। सीट बंटवारे से लेकर प्रचार तक सब व्यवस्थित रहा। नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की संयुक्त रैलियों ने वोटरों में भरोसा पैदा किया। इसके मुकाबले महागठबंधन बिखरा हुआ दिखा।

वादों के मुकाबले विश्वास वाली राजनीति

तेजस्वी यादव ने एक परिवार–एक नौकरी जैसे कई बड़े वादे किए, लेकिन नीतीश कुमार की 10 हजार रुपये सहायता योजना अधिक प्रभावी साबित हुई। मतदाताओं ने वादों की बजाय भरोसे को चुना।

सीट बंटवारे का विवाद

महागठबंधन के भीतर कई सीटों पर अंत तक मतभेद बने रहे। कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट हुई, जिसका सीधा नुकसान आरजेडी को उठाना पड़ा।

रुझान बदल भी सकते हैं, लेकिन अब तक की तस्वीर साफ बता रही है कि बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है और महागठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका लग चुका है।

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