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Thursday, January 15, 2026
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बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने मेहुल चोकसी की अपील खारिज की, भारत प्रत्यर्पण की राह हुई साफ

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बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ ने भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। यह फैसला भारत सरकार के पक्ष में गया है और अब चोकसी को भारत वापस लाने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।

अदालत ने एंटवर्प की अपीली अदालत के 17 अक्टूबर के फैसले को बरकरार रखा है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि चोकसी की यह दलील निराधार है कि उन्हें भारत भेजे जाने पर यातना का सामना करना पड़ेगा। ब्रसेल्स के महाधिवक्ता ने ईमेल के माध्यम से बताया कि चोकसी की अपील खारिज होने के बाद अब निचली अदालत का फैसला ही प्रभावी रहेगा।

मेहुल चोकसी ने पंजाब नेशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में अपने प्रत्यर्पण को चुनौती दी थी। एंटवर्प की अपीली अदालत ने पहले ही भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को वैध बताते हुए उसे बरकरार रखा था। अदालत ने जिला अदालत के फैसले में कोई कमी नहीं पाई जिसमें मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को लागू करने और चोकसी के प्रत्यर्पण की अनुमति दी गई थी।

अक्टूबर में एंटवर्प की अपीली अदालत ने चोकसी की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा था कि भारत में उनके खिलाफ राजनीतिक मुकदमे की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि भारत में उन्हें यातना या निष्पक्ष सुनवाई से वंचित किए जाने का कोई खतरा नहीं है। चोकसी द्वारा लगाए गए अपहरण के दावों को भी अदालत ने खारिज कर दिया था।

चोकसी ने दावा किया था कि 2021 में अण्टीगुआ और बारबूडा में उनका अपहरण भारत की मदद से कराया गया था। लेकिन अदालत ने कहा कि इंटरपोल की रिपोर्ट भी इस दावे की पुष्टि नहीं करती है। अपीली अदालत ने स्पष्ट किया था कि चोकसी को भारत भेजे जाने पर किसी प्रकार के दुर्व्यवहार का कोई जोखिम नहीं है।

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