बांग्लादेश में शुक्रवार सुबह अचानक धरती इतने जोर से हिली कि भारत के कई इलाकों में लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। पाकिस्तान में भूकंप आने के कुछ ही घंटों बाद बांग्लादेश में पांच दशमलव सात तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने बताया कि यह भूकंप सुबह दस बजकर आठ मिनट पर आया। इसका केंद्र नरसिंगडी के पास था और इसकी गहराई दस किलोमीटर मापी गई। झटके इतने तेज थे कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता मालदा नादिया कूच बिहार और उत्तर बंगाल के कई जिलों तक महसूस हुए। कोलकाता में कई इमारतें कुछ सेकंड तक कांपती रहीं जिससे लोग घबरा गए और सड़कों पर दौड़ते हुए दिखाई दिए।
कोलकाता में घबराहट और सोशल मीडिया पर डर की आवाजें
भूकंप के बाद कोलकाता के लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं पोस्ट कीं। कई लोगों ने लिखा कि उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे तेज झटका महसूस किया और कुछ ने दावा किया कि उनकी इमारत तीस सेकंड तक हिलती रही। अन्य ने लिखा कि कंपन इतने तेज थे कि नींद में सो रहा कोई भी व्यक्ति तुरंत जाग जाए। सुबह दस बजकर दस मिनट के करीब कोलकाता में दो से तीन सेकंड तक दीवारें हिलने का अनुभव हुआ और लोगों में भय की स्थिति बन गई।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार किसी भी तरह के नुकसान या चोट की खबर नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को कुछ समय के लिए खुले स्थान में रहने की सलाह दी गई। यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में भी एक दिन पहले पांच दशमलव तीन तीव्रता का भूकंप आया था जिससे अफगानिस्तान सीमा के पास के शहरों में हलचल मच गई थी। हालांकि इस्लामाबाद और पेशावर में नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली।
टेक्टोनिक प्लेट्स के कारण बढ़ रहा जोखिम
विशेषज्ञों ने कहा है कि यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है क्योंकि यहां हिमालयन टेक्टोनिक प्लेट्स की टक्कर लगातार जारी रहती है। इसी कारण प्रति वर्ष कई मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इंडियन और यूरेशियन प्लेटों के टकराव की वजह से यह पूरा क्षेत्र भूकंप प्रवण बन चुका है और किसी भी समय कंपन महसूस हो सकते हैं।
एजेंसियों के अनुसार इस साल अब तक पाकिस्तान में 295, बांग्लादेश में 419 और पश्चिम बंगाल के आसपास 588 मध्यम तीव्रता के भूकंप रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि यह पूरा इलाका लगातार भूकंपीय दबाव सह रहा है। विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि भले ही इस बार किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ हो लेकिन भविष्य में खतरा बना रह सकता है।

















