अहमदाबाद में इस साल जून में हुए एयर इंडिया विमान दुर्घटना की स्वतंत्र जांच को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीजीसीए (DGCA) से जवाब मांगा है।
यह याचिका दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल की ओर से दायर की गई है। उन्होंने कोर्ट से इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पायलट को दोष नहीं दिया जाना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, “आप अपने ऊपर बोझ मत रखिए। यह एक दुर्घटना थी, और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में भी पायलट के खिलाफ कोई आरोप या संकेत नहीं हैं।” अदालत ने स्पष्ट किया कि हादसे के लिए पायलट जिम्मेदार नहीं थे और जांच रिपोर्ट में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है।
याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने यह तर्क रखा कि अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल के बारे में गलत तरीके से लिखा गया था। इस पर न्यायपीठ ने कहा कि “वह रिपोर्ट केवल भारत को दोषी ठहराने के लिए लिखी गई थी, उसका कोई वास्तविक आधार नहीं है।”
यह हादसा 12 जून 2025 को हुआ था जब एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही मेघाणी नगर इलाके में एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिर गया था। विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक व्यक्ति जीवित बचा, जबकि बाकी सभी की मौत हो गई। इसके अलावा दुर्घटनास्थल पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए।
एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड (AAIB) ने 12 जुलाई को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें विमान के दोनों पायलटों के बीच बातचीत का विवरण दिया गया था। रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि हादसे के लिए पायलट जिम्मेदार थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी। इससे पहले, पायलट के पिता और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने कोर्ट से मांग की थी कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में और किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए।

















