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Friday, September 25, 2026
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SIR विवाद: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, जानिए पूरा मामला

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है, जिसमें Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठाया गया है।

यह याचिका ऐसे समय में सामने आई है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित मतभेद की मीडिया रिपोर्टों ने राजनीतिक विवाद को तेज कर दिया है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि SIR से संबंधित फैसले आयोग की सामूहिक और सर्वसम्मत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर हुई है?

25 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलाव अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों को असंवैधानिक और रद्द करने योग्य घोषित करने की मांग की है।

याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) या न्यायिक जांच की मांग भी की गई है। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने CEC ज्ञानेश कुमार और कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर कार्रवाई की मांग की है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से शुरू हुआ विवाद

पूरे मामले की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के तीन सदस्यों के बीच कथित मतभेद से जुड़ी मीडिया रिपोर्टें हैं। The Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।

रिपोर्ट में SIR, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई की मांग तेज कर दी।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्टों में सामने आए कथित मतभेदों पर निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर अधिकारियों या आयुक्तों की राय और टिप्पणियां निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। EC के अनुसार, SIR से संबंधित अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी भी प्रक्रिया में शामिल थी।

इसलिए फिलहाल विवाद के दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं—एक तरफ मीडिया रिपोर्ट और उसके आधार पर लगाए जा रहे आरोप हैं, जबकि दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग इन दावों को अंतिम फैसलों में असहमति के रूप में स्वीकार नहीं करता।

कांग्रेस और विपक्ष का देशभर में प्रदर्शन

SIR विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने सड़क पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस ने 25 सितंबर को देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव आयोग के कार्यालयों के सामने प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों और जिला संगठनों को भी विरोध कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली में भी चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन की योजना बताई गई है। इसके अलावा विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन की घोषणाएं सामने आई हैं।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी

SIR विवाद के बीच विपक्षी दल संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर समर्थन मांगा है। दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव लाने के लिए मसौदा तैयार किया जा रहा है। रिपोर्टों में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लिए जाने की भी बात कही गई है।

कांग्रेस सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया गया है कि नोटिस आने वाले दिनों या अगले कुछ सप्ताह में पेश किया जा सकता है। हालांकि, प्रस्ताव का मसौदा तैयार होना और संसद में प्रस्ताव का संवैधानिक रूप से स्वीकार होना दो अलग-अलग चरण हैं।

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