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Supreme Court News: धर्मांतरण मामले में आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, आपराधिक कार्रवाई पर लगाई रोक

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Supreme Court News: मध्य प्रदेश के कथित धर्मांतरण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी हरमन टेलर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर भी नोटिस जारी किया है।

Supreme Court News , नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक कथित धर्मांतरण मामले में आरोपी व्यक्ति को अंतरिम राहत देते हुए उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने एक परिवार पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया था। हालांकि, आरोपी का दावा है कि वह स्वयं हिंदू धर्म का अनुयायी है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।

यह मामला न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार किया गया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता हरमन टेलर की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता के पति ने कथित रूप से करीब आठ वर्ष पहले इस्लाम धर्म अपनाया था, जबकि इस संबंध में एफआईआर काफी बाद में दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष का कहना था कि इस देरी पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि हरमन टेलर और उनका परिवार हिंदू धर्म का पालन करता है। इसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। उनका कहना है कि उनका किसी को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने या मजबूर करने से कोई संबंध नहीं है।

मामला उस महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया कि उसके पति ने धर्म परिवर्तन के बाद उसे और उसके नाबालिग बेटे को भी इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पति ने यह सब हरमन टेलर के प्रभाव या कहने पर किया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने हरमन टेलर के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (MP Freedom of Religion Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और बाद में चार्जशीट भी दाखिल कर दी।

इसके बाद टेलर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की। उन्होंने अदालत से कहा कि उनके खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने शिकायतकर्ता या उसके बेटे का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की थी।

हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री आरोपी की कथित भूमिका की ओर संकेत करती है। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और उनसे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच एवं परीक्षण ट्रायल के दौरान होना चाहिए। हाई कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए हरमन टेलर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हें फिलहाल अंतरिम राहत मिल गई है।

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