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13 साल की रेप पीड़िता के पक्ष में बड़ा फैसला, 24 हफ्ते की सीमा पार, फिर भी हाई कोर्ट ने दी अबॉर्शन की इजाजत

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 28 सप्ताह की गर्भवती 13 वर्षीय रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दे दी है। यह फैसला उस समय आया जब गर्भधारण की अवधि 24 सप्ताह की कानूनी सीमा से अधिक हो चुकी थी।

जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की बेंच में जस्टिस विशाल मिश्रा ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानून 24 सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति सामान्य परिस्थितियों में नहीं देता, लेकिन गर्भ को जारी रखने या न रखने का निर्णय अंततः गर्भवती की इच्छा पर निर्भर करता है। नाबालिग के मामले में उसकी और उसके अभिभावकों की सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मामला सागर जिले के खुराई की एक अदालत के माध्यम से हाई कोर्ट पहुंचा था। नाबालिग बच्ची और उसके माता-पिता ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे गर्भ को जारी नहीं रखना चाहते। अदालत ने इस इच्छा को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी विचार किया।

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 28 सप्ताह में भी चिकित्सकीय गर्भपात संभव है, हालांकि इसमें कुछ जोखिम शामिल हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जोखिमों की पूरी जानकारी पीड़िता और उसके परिवार को दी जाए और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में सुरक्षित तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाए।

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि गर्भ को जारी रखने या समाप्त करने का निर्णय महिला की स्वायत्तता से जुड़ा है। नाबालिग मामलों में भी उसकी इच्छा और हितों को सर्वोपरि माना जाना चाहिए।

यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि संवेदनशील मामलों में न्यायिक विवेक और मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण भी माना जा रहा है।

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