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Thursday, February 5, 2026
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बग्घी विवाद पर प्रशासन और शंकराचार्य आमने-सामने, अविमुक्तेश्वरानंद पर कार्रवाई की चेतावनी, 24 घंटे का अल्टीमेटम

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संगम तट पर चल रहे माघ मेले में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच टकराव और गहरा गया है। मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को एक और नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जवाब संतोषजनक न होने पर मेले से प्रतिबंधित किया जा सकता है और दी जा रही सुविधाएं भी निरस्त की जा सकती हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद शंकराचार्य के समर्थकों और भक्तों में नाराजगी बढ़ गई है। उनके राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और मेला प्रशासन बदले की भावना से काम कर रहा है। उनका आरोप है कि पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शंकराचार्य के शिविर पंडाल के पीछे पुराने दिनांक में नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद अधिकारी खुद आकर पूछने लगे कि नोटिस का जवाब क्यों नहीं दिया गया।

24 घंटे में जवाब नहीं तो मेले से बाहर करने का फरमान

प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि 24 घंटे के भीतर जवाब नहीं मिला तो शंकराचार्य और उनकी संस्था को मेले से बाहर किया जा सकता है। इस पर शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने कहा कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और तय समय के भीतर प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।

नोटिस में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन आपात स्थितियों के लिए आरक्षित त्रिवेणी पंटून पुल नंबर-2 पर लगाए गए बैरियर को तोड़कर संगम अपर मार्ग से बिना अनुमति बग्घी के साथ भीड़ में प्रवेश किया गया। प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। किसी भी तरह के वाहन ले जाने पर रोक थी।

प्रशासन ने यह भी कहा है कि यह क्षेत्र स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील था। ऐसे में बग्घी के साथ आगे बढ़ने से भीड़ प्रबंधन में भारी कठिनाई हुई और लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि संगम नोज तक बग्घी ले जाने का प्रयास किया गया, जहां उस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान कर रहे थे।

इसके अलावा नोटिस में एक और गंभीर बात कही गई है। प्रशासन का आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा खुद को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड लगाए गए हैं, जबकि उनके शंकराचार्य होने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय से रोक का हवाला दिया गया है। इसे अदालत की अवमानना की श्रेणी में बताया गया है।

नोटिस के अंत में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 24 घंटे के भीतर यह बताया जाए कि इन कृत्यों के कारण शंकराचार्य की संस्था को दी गई भूमि और सुविधाएं क्यों न निरस्त कर दी जाएं और उन्हें हमेशा के लिए मेले में प्रवेश से प्रतिबंधित क्यों न किया जाए। तय समय में जवाब नहीं आने पर एकतरफा निर्णय लेने की बात भी कही गई है।

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