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Thursday, February 5, 2026
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नितिन नवीन के सामने बड़ी परीक्षा, दक्षिण भारत से लेकर भाजपा शासित राज्यों तक संतुलन की चुनौती

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संतोष कुमार। भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने संगठन को आगे ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी है। पिछले एक दशक में पार्टी ने जिस तेजी से विस्तार किया है, उसे बनाए रखना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ मजबूत करना है। इसके साथ ही जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां जीत की लय को कायम रखना भी जरूरी होगा।

नितिन नवीन के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह सबसे कम उम्र में भाजपा अध्यक्ष बने हैं। उन्हें युवा नेताओं के जोश और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव के बीच संतुलन बनाना होगा। मोदी सरकार के बाद भाजपा देश के लगभग हर हिस्से में मजबूत हुई है। आज पार्टी के करीब 14 करोड़ सदस्य हैं और वह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है।

करीब दो दर्जन राज्यों में भाजपा अकेले या सहयोगियों के साथ सत्ता में है। इसके बावजूद दक्षिण भारत अभी भी पार्टी के लिए पूरी तरह अभेद्य किला बना हुआ है। कर्नाटक में भाजपा सरकार बना चुकी है और आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ सत्ता में भागीदार है। लेकिन तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में अभी भी पार्टी को लंबा रास्ता तय करना है।

दक्षिण के राज्यों में पैठ बनाना चुनौती

तेलंगाना में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 17 में से आठ सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई। इसके बावजूद राज्य में सरकार बनाने का सपना अब भी अधूरा है। केरल में पहली बार एक सांसद जीतना और तिरुवनंतपुरम में मेयर बनाना बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन वहां संगठन को जमीन पर और मजबूत करना बाकी है।

तमिलनाडु में 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले उतरने की रणनीति सफल नहीं हो सकी। अब विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके के साथ मिलकर राजग सरकार बनाने की कोशिश की जा रही है। इन सभी राज्यों में नितिन नवीन की संगठनात्मक क्षमता की असली परीक्षा होगी।

भाजपा शासित राज्यों में भी चुनौतियां कम नहीं हैं। गुजरात जैसे राज्य में पार्टी तीन दशक से सत्ता में है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी है। यहां सरकार और संगठन के बीच तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि सत्ता विरोधी लहर की जगह सरकार के पक्ष में जन समर्थन कायम रहे।

बिहार में 20 साल बाद भी राजग की जीत के पीछे जो संगठनात्मक मेहनत और रणनीति रही है, उसका अनुभव नितिन नवीन के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि वह पार्टी की रफ्तार को कैसे बरकरार रखते हैं और नए मोर्चों पर किस तरह सफलता दिलाते हैं।

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