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Land for Job Case: लालू-राबड़ी के आधे परिवार पर आरोप तय, RJD की राजनीति पर संकट

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Land for Job Case: चारा घोटाले में सजा काट चुके बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री Lalu Prasad Yadav की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। अब उनके साथ-साथ उनका परिवार भी गंभीर कानूनी संकट में फंसता नजर आ रहा है। दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव के परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल चलाने का आदेश दिया है।

कोर्ट के इस फैसले के बाद लालू परिवार के आधे सदस्यों पर जेल जाने और राजनीति से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है। अगर इस मामले में लालू प्रसाद यादव को और उनके परिवार को सजा होती है तो राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व पर खतरा मंडराने लगेगा।

क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?

लैंड फॉर जॉब केस में आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, उस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई। यह जमीन कथित तौर पर लालू यादव के परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्टर्ड कराई गई। इस मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने वर्ष 2022 में प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और मामला अदालत तक पहुंचा।

किन पर तय हुए आरोप

दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, दोनों बेटे पूर्व डिप्टी सीएम Tejashwi Yadav और पूर्व मंत्री Tej Pratap Yadav, साथ ही दो बेटियां सांसद Misa Bharti और हेमा यादव के खिलाफ ट्रायल के लिए आरोप तय किए हैं। कुल 103 आरोपियों में से 52 को कोर्ट ने बरी कर दिया है, जबकि पांच की इस दौरान मौत हो चुकी है। अब लालू-राबड़ी परिवार के छह सदस्यों समेत 46 आरोपियों को ट्रायल का सामना करना होगा।

किन धाराओं में चलेगा मुकदमा

कोर्ट ने लालू परिवार के सदस्यों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) व 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए हैं। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर दो साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।

भारतीय कानून के अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि को यदि दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता खत्म हो जाती है। इतना ही नहीं, सजा पूरी होने के बाद भी छह साल तक वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में यदि लालू परिवार के इन सदस्यों को दोषी ठहराया गया तो तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और मीसा भारती लंबे समय तक चुनावी राजनीति से बाहर हो सकते हैं।

आरजेडी की राजनीति पर मंडराता संकट

इस समय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कमान मुख्य रूप से तेजस्वी यादव के हाथ में है। तेज प्रताप यादव परिवार और पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक राह पर हैं, जबकि मीसा भारती लोकसभा सांसद हैं और राबड़ी देवी विधान परिषद की सदस्य हैं। यदि अदालत से सजा आती है तो आरजेडी की नेतृत्व संरचना पर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में पार्टी की बागडोर परिवार की किसी अन्य सदस्य जैसे रोहिणी आचार्या, तेजस्वी की पत्नी राजश्री यादव या फिर किसी नए चेहरे के हाथ में जा सकती है।

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