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संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप: कांग्रेस ने RSS प्रांत प्रचारक को लिखा खुला पत्र, आधिकारिक जवाब की मांग

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Indore में कलेक्टर के आरएसएस के प्रांत कार्यालय अर्चना भवन पहुंचने की घटना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इसे संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता Amit Chourasia ने आरएसएस के प्रांत प्रचारक राजमोहन को एक खुला पत्र लिखते हुए संघ कार्यालय से आधिकारिक और सार्वजनिक जवाब की मांग की है।

पत्र में कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब एक संवैधानिक पद पर आसीन कलेक्टर को संघ कार्यालय में तलब किया जा सकता है तो क्या अब मध्य प्रदेश का प्रशासन औपचारिक रूप से संघ के नियंत्रण में आ चुका है? पत्र में कहा गया है कि यह स्थिति न केवल लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विपरीत है।

भाजपा सरकार और प्रशासन पर निशाना

पत्र में भाजपा सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए इंदौर शहर में बढ़ते अपराध, अस्पतालों में वितरित हो रही अमानक दवाइयाँ, मिलावटी खाद्य पदार्थों और नगर निगम की बदहाल सेवाओं का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब प्रशासनिक विफलताएँ आम जनता को प्रभावित कर रही हैं, तब संघ की भूमिका केवल औपचारिक बैठकों तक ही सीमित क्यों है।

“क्या विकास कार्य भी संघ की निगरानी में होंगे?”

कांग्रेस ने पत्र में यह भी तंज कसा कि यदि प्रशासनिक फैसलों में संघ की भूमिका बढ़ रही है तो क्या आने वाले समय में सभी विकास कार्य भी संघ की निगरानी में होंगे। पत्र में भाजपा पर 40 प्रतिशत चढ़ावे का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि विकास योजनाएँ भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही हैं।

अमित चौरसिया ने मांग की है कि यदि संघ प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है तो आरएसएस कार्यालय के बाहर जन-शिकायत पेटी लगाने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि जब सीएम हेल्पलाइन और 311 ऐप पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुके हैं तो जनता को अपनी समस्याएँ सीधे संघ तक पहुंचाने का अवसर मिलना चाहिए।

पुलिस और प्रशासन पर नियंत्रण को लेकर सवाल

खुले पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि जब इंदौर कलेक्टर को संघ कार्यालय बुलाया जा सकता है, तो क्या अब अन्य प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस कमिश्नरी भी संघ के नियंत्रण में आ चुकी है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या इंदौर पुलिस कमिश्नर को भी प्रांत प्रचारक तलब कर शहर में बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था पर जवाब मांगा जाएगा या फिर संघ की सक्रियता केवल चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रहेगी।

पत्र के अंत में कांग्रेस ने आरएसएस से स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब की मांग करते हुए कहा है कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि राज्य सरकार आखिर चला कौन रहा है—संविधान या संघ।

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