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अचानक वोटर लिस्ट से गायब हुए 95 लाख नाम! चार राज्यों में चुनाव आयोग ने की बड़ी कार्रवाई

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चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के तहत मंगलवार को चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई। यह कदम मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाया गया है।

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को और सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। SIR के तहत मंगलवार को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई। इन चारों क्षेत्रों से मिलाकर कुल 95 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं।

किस राज्य में कितने नाम हटे?

  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह: कुल 3.10 लाख मतदाताओं में से 64,000 नाम हटाए गए।
  • केरल: 2.78 करोड़ मतदाताओं में से 24.08 लाख नाम हटाए गए।
  • छत्तीसगढ़: 2.12 करोड़ मतदाताओं में से 27.34 लाख नाम हटाए गए।
  • मध्य प्रदेश: 5.74 करोड़ मतदाताओं में से 42.74 लाख नाम हटाए गए।

नाम क्यों हटाए गए?

चुनाव आयोग के अनुसार, ये नाम मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं के हैं। जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। जो मतदाता अपने पंजीकृत पते से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं या लंबे समय से वहां नहीं रह रहे हैं। जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।

22 जनवरी तक कर सकते हैं दावा

चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतते हुए सभी मतदाताओं को एक मौका दिया है। जिन मतदाताओं का नाम गलती से हटा दिया गया है, वे इसे दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए दावा पेश कर सकते हैं। दावे और आपत्ति दर्ज करने की अवधि 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। इसके बाद मतदाता पंजीकरण अधिकारी सभी आवेदनों पर विचार करके अंतिम निर्णय लेंगे।

अंतिम सूची फरवरी में होगी जारी

दावे और आपत्तियों की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अंतिम संशोधित मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी कर दी जाएगी। यह सूची संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट, चुनाव आयोग के राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) और ‘ईसीआई नेट’ मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी।

चुनाव आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम ऑनलाइन जरूर जांच लें। अगर किसी का नाम सूची से छूट गया है या हटा दिया गया है तो वह समय रहते दावा दर्ज कराए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता को मतदान के अपने अधिकार से वंचित न रहना पड़े।

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