मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक सख्त आदेश दिया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की पीठ ने शहर के सार्वजनिक स्थानों, विशेष रूप से पर्यटन स्थलों से आवारा कुत्तों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने के लिए एक अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
13 जनवरी तक पेश करनी होगी रिपोर्ट
कोर्ट ने नगर निगम को 13 जनवरी से पहले इस मामले में एक विस्तृत कार्य रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया है। इस रिपोर्ट में आवारा कुत्तों की नसबंदी के आंकड़े भी शामिल करने होंगे। पीठ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर यह रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होती है तो वे इंदौर नगर निगम के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दे सकते हैं।
यह आदेश क्यों दिया गया?
हाईकोर्ट का यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) पर आया है। इस याचिका में इंदौर शहर की हरियाली और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि शहर की सीमा के भीतर सार्वजनिक स्थानों से मवेशियों, भेड़-बकरियों और आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
इससे पहले भी कोर्ट ने राज्य के वकील से इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। पिछले साल नवंबर में भी कोर्ट ने आवारा कुत्तों को हटाने के संबंध में नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। 19 दिसंबर को वकील ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम ने इस दिशा में कुछ कदम उठाए हैं और शहर से आवारा मवेशियों को हटाने का काम लगातार जारी है।




















