ज्योतिष शास्त्र में सैकड़ों योगों में अखंड साम्राज्य योग को सबसे प्रभावशाली और दुर्लभ माना जाता है। इस योग वाले जातक के जीवन पर आर्थिक संकट का छाया तक नहीं पड़ता। माना जाता है कि यह योग व्यक्ति को शून्य से शिखर तक पहुंचा देता है और इसका प्रभाव लगभग पचहत्तर वर्षों तक रहता है। यह एक ऐसा राजयोग है जो अन्य कई प्रकार के दोषों के प्रभाव को भी कम करने की शक्ति रखता है।
यह योग केवल चार स्थिर लग्नों वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ में ही बनता है। इसके निर्माण में गुरु यानी बृहस्पति की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक लग्न के लिए गुरु का एक खास भाव में स्वामित्व या स्थिति अनिवार्य होती है। साथ ही बलवान चंद्रमा का गुरु से संबंध इस योग को पूरा करता है।
अखंड साम्राज्य योग के लाभ
अखंड साम्राज्य योग के लाभ अनेक हैं। यह व्यक्ति को धन प्रतिष्ठा और उच्च पद प्रदान करता है। जातक को पैतृक संपत्ति के साथ ही निवेश और अचानक लाभ के मौके मिलते हैं। ऐसे लोग कुशल नेतृत्व क्षमता से संपन्न होते हैं और प्रशासनिक अधिकारी या बड़े राजनेता बनते हैं। यह योग दूसरे भाव में धन नवें में भाग्य और ग्यारहवें में व्यापारिक सफलता देता है।
कभी-कभी नहीं मिलता है इसका लाभ
परंतु इस योग के पूरे फल न मिलने की भी संभावना रहती है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सीता की कुंडली में यह योग था फिर भी उन्हें वनवास सहना पड़ा। ज्योतिष के नियमों के अनुसार अगर लग्न का स्वामी कमजोर हो या गुरु चंद्रमा पर पापी ग्रहों की दृष्टि पड़े तो योग का प्रभाव घट जाता है। खासकर अगर ग्रह छठे या आठवें भाव में फंसे हों तो लाभ में बाधा आती है।
इस योग की सटीक पहचान और फलादेश के लिए अन्य ग्रहों की स्थिति और दशाओं का विश्लेषण जरूरी है। एक अनुभवी ज्योतिषी ही कुंडली में इस दुर्लभ योग की उपस्थिति और उसकी शक्ति का सही आकलन कर सकता है।





















