भारत की अगली जनगणना 2027 में आयोजित की जाएगी और यह देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में इसकी पुष्टि की है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि डेटा संग्रह मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा और नागरिक वेब पोर्टल के जरिए स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी और अन्य प्रशासनिक कारणों से टल गई थी जो अब 2027 में होगी। यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों की सूचीकरण और मैपिंग होगी। दूसरे चरण में फरवरी-मार्च 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी।
इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें स्वतंत्र भारत में पहली बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य सभी जातियों का डेटा भी एकत्र किया जाएगा। आखिरी बार पूर्ण जाति गणना 1931 में हुई थी। यह डेटा भविष्य में आरक्षण नीतियों और सामाजिक योजनाओं के लिए आधार बनेगा।
डिजिटल जनगणना के कई फायदे हैं। इससे आंकड़े तेजी से उपलब्ध होंगे और प्रारंभिक परिणाम महज 10 दिनों में मिलने की उम्मीद है। अंतिम आंकड़े 6-9 महीनों में तैयार हो सकते हैं जबकि 2011 की जनगणना के आंकड़ों को अंतिम रूप देने में कई साल लग गए थे। इससे परिसीमन और योजनाओं में तेजी आएगी।
हालांकि इस डिजिटल जनगणना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। देश के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या डिजिटल डिवाइड पैदा कर सकती है। लगभग 30 लाख गणनाकर्मियों को नई तकनीक के प्रशिक्षण की जरूरत होगी। डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय है।
सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाने का फैसला किया है। जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है वहां कागजी फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। मोबाइल ऐप 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा ताकि अधिक से अधिक लोग इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।

















