पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बीजेपी अपनी रणनीति तेज करने में जुट गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के बीजेपी सांसदों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में पीएम मोदी ने साफ कहा कि सांसद राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाएं। उन्होंने कहा कि बंगाल में जिस तरह की हिंसा हो रही है उसे जनता तक ले जाना बेहद जरूरी है। पीएम ने खगेन मुर्मू पर हुए हमले को चिंता का विषय बताया और कहा कि टीएमसी की हिंसा को लगातार उजागर किया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि सांसदों को गांव गांव जाकर यह बताना चाहिए कि हालात वास्तव में कैसे हैं। बंगाल से बीजेपी के 12 लोकसभा सांसद और 2 राज्यसभा सदस्य हैं। पीएम ने सभी से कहा कि वे लोगों तक यह संदेश मजबूती से पहुंचाएं कि टीएमसी सरकार शांति और सुरक्षा बरकरार रखने में नाकाम है। उन्होंने सांसदों से एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी मांगा है जिसमें बताया जाए कि वे 2026 के चुनाव के लिए जमीन पर क्या काम करेंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR अभियान को टीएमसी लगातार विरोध कर रही है। टीएमसी आरोप लगा रही है कि SIR के दौरान कई लोगों की मौत हुई है और बीएलओ खतरे में हैं। इसी तनावपूर्ण माहौल में पीएम मोदी का यह संदेश राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में बताया कि 8 दिसंबर को वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर चर्चा होगी। इसके बाद 9 दिसंबर को चुनाव सुधारों पर बहस होगी। शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि SIR प्रक्रिया के दौरान हुई मौतों की जिम्मेदारी सरकार और आयोग पर है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति को और गर्म कर दिया है। एक तरफ पीएम मोदी कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ टीएमसी चुनाव आयोग और केंद्र पर दबाव बढ़ा रही है।



















