Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत सोमवार को जैसे ही हुई, विपक्ष और सरकार के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। विपक्षी दलों ने देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल चर्चा कराने की मांग रखी। इसी मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं हो रही हैं और लाखों नाम गलत तरीके से हटाए जाने का खतरा है। इसलिए इस पर तुरंत चर्चा जरूरी है। हालांकि सरकार ने इसे खारिज नहीं किया, लेकिन तत्काल चर्चा के लिए सहमति भी नहीं दी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि सरकार SIR पर चर्चा की मांग पर विचार कर रही है और इसे ठुकराया नहीं गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार समेत किसी भी विषय पर चर्चा से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
इसी बीच सरकार ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस सप्ताह लोकसभा में विशेष चर्चा कराने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक यह चर्चा गुरुवार या शुक्रवार को कराई जा सकती है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस बहस के लिए पूरे 10 घंटे का समय निर्धारित किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा लेंगे।
सरकार का कहना है कि वंदे मातरम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है और सभी दलों को इसमें शामिल होना चाहिए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक और कार्यमंत्रणा समिति की मंजूरी के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने भी इसे हरी झंडी दे दी है।
इस चर्चा की पृष्ठभूमि तब और अहम हो गई जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के शनिवार को दिए गए बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। भोपाल में मदनी ने कहा था कि “मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं। अगर कहा जाएगा ‘वंदे मातरम’ बोलो तो वे बोलना शुरू कर देंगी।” इस बयान पर कई राजनीतिक दलों ने नाराजगी जताई और सरकार ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा को और प्राथमिकता दी।

















