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Thursday, January 15, 2026
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महिला खतना पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, दाऊदी बोहरा समुदाय की प्रथा पर केंद्र से जवाब तलब

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Supreme Court ने शुक्रवार को महिला खतना यानी Female Genital Mutilation पर दायर एक अहम याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी। अदालत में यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित खतना प्रथा पर रोक लगाने की मांग करती है। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने इस मामले में केंद्र और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए। कोर्ट ने साफ किया कि यह मुद्दा आस्था और मानवाधिकार दोनों से जुड़ा है और इसे गंभीरता से देखा जाएगा।

Petition करने वाली संस्था चेतना वेलफेयर सोसाइटी का कहना है कि महिला खतना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। याचिका में तर्क दिया गया है कि किसी नाबालिग बच्ची के जननांग को गैर चिकित्सकीय कारण से छूना भी POCSO Act के तहत अपराध है। याचिका में डब्ल्यूएचओ का हवाला देते हुए कहा गया कि FGM को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना गया है और यह बच्चियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के खिलाफ है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछले वर्षों में की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। पूर्व सीजेआई बी आर गवई ने भी अपने कार्यकाल में FGM पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि बेटियों के साथ किया जाने वाला यह व्यवहार संविधान की भावना के खिलाफ है। अदालत महिलाओं के साथ धार्मिक स्थलों पर होने वाले भेदभाव सबरीमाला और पारसी अगियारी जैसे मामलों को भी इसी दृष्टि से देख रही है।

FGM यानी खतना का प्रचलन मुख्य रूप से कुछ समूहों में देखा जाता है। कट्टरपंथी विचार रखने वाले लोग मानते हैं कि जब तक लड़की का खतना नहीं होता वह शुद्ध नहीं मानी जाती। इसी सोच के आधार पर शादी की उम्र वाली कई लड़कियों का खतना समुदाय के अंदर करा दिया जाता है। इसमें जननांग का एक छोटा हिस्सा काट दिया जाता है जिससे बच्ची को अत्यधिक दर्द और मानसिक आघात झेलना पड़ता है। कई बार यह प्रक्रिया प्लास्टिक सर्जरी के नाम पर की जाती है।

Law के मुताबिक यह अपराध है। किसी नाबालिग बच्ची का खतना कराने पर सात साल तक की सजा हो सकती है। समाज में जागरूकता बढ़ने के बाद ऐसे मामलों में कमी जरूर आई है लेकिन पूरी तरह से यह प्रथा खत्म नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट की नोटिस के बाद अब इस मामले पर देशव्यापी बहस तेज होने की संभावना है। अदालत ने कहा कि केंद्र को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा कि वह महिला खतना पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाएगा।

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