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Wednesday, October 14, 2026
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चुनाव में कैश बांटने पर मुरली मनोहर जोशी ने उठाया सवाल, समान विकास के बिना लोकतंत्र अधूरा

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भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने चुनावी राजनीति और कैश वितरण को लेकर एक गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि चुनाव में पैसा बांटना किसी भी तरह का वेलफेयर नहीं माना जा सकता और यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश में समान विकास की जरूरत है और जब तक सभी राज्यों में बराबरी का विकास नहीं होगा तब तक संविधान की वास्तविक भावना पूरी नहीं हो सकती।

छोटे राज्यों का गठन और आर्थिक संतुलन की मांग

जोशी का कहना है कि देश में सामाजिक और राजनीतिक अंतर तभी कम हो सकते हैं जब राज्यों का आकार संतुलित हो। उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे राज्यों का गठन किया जाना चाहिए ताकि हर क्षेत्र की जनसंख्या लगभग समान हो। इस तरह लोकसभा और विधानसभा की सीटों का भी संतुलन बनाया जा सकेगा और हर नागरिक की आवाज बराबरी से सुनी जा सकेगी। जी कृष्णमूर्ति के जन्मदिन पर आयोजित समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि हर नागरिक को वोट देने का समान अधिकार मिला है पर यह अधिकार तभी प्रभावी होता है जब आर्थिक स्थिति भी बराबर हो।

उन्होंने कर्नाटक बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन इलाकों में रहने वाले लोगों की आर्थिक दशा में बड़ा अंतर दिखता है। राज्य प्रदेश और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर संसाधन भी अलग होते हैं जिससे विकास की रफ्तार प्रभावित होती है। उनके अनुसार जो व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत होता है वह अपने हितों को बचाने के लिए मतदान करता है जबकि दूर दराज और कमजोर इलाकों में रहने वाला व्यक्ति इस स्थिति में नहीं होता कि अपनी जरूरतों के अनुरूप राजनीतिक निर्णय प्रभावित कर सके।

आर्थिक न्याय के बिना वोट का अधिकार अधूरा

जोशी ने बताया कि संविधान सभी नागरिकों को न्याय दिलाने का वादा करता है। यह न्याय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक न्याय को भी शामिल करता है। उन्होंने कहा कि जब तक आर्थिक न्याय नहीं मिलेगा तब तक वोट का अधिकार अपनी वास्तविक उपयोगिता नहीं निभा सकेगा। उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि आंबेडकर ने भी आर्थिक समानता पर जोर दिया था और इसे लोकतंत्र के लिए अनिवार्य बताया था।

जोशी ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि देश में विकास असमान रहेगा तो अन्य अधिकारों को लागू करना मुश्किल होता जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक असमानता बनी रहती है तो यह भेदभाव की स्थिति पैदा करती है और इससे लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने चुनाव से पहले कैश बांटने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकारें इसे वेलफेयर बताती हैं मगर जनता इसे वोट खरीदने की कोशिश मानती है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज कई राज्यों में चुनाव से पहले अलग अलग कैश इंसेंटिव दिए गए जिनमें महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं भी शामिल थीं। उन्होंने बताया कि यह समझना जरूरी है कि वेलफेयर और वोट खरीदने के बीच की रेखा बहुत पतली है और इसे लेकर गंभीर चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए असली वेलफेयर यह है कि हर राज्य हर इलाके और हर वर्ग तक समान विकास पहुंचे ताकि आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों का वास्तविक संतुलन बन सके।

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