Patna Sahib Seat Result Trends: बिहार में दोबारा एनडीए सरकार बनने के साफ संकेत मिल रहे हैं। दो घंटे की काउंटिंग के बाद रुझानों में भाजपा–जेडीयू गठबंधन आराम से बहुमत हासिल करता दिख रहा है। लेकिन इस राजनीतिक उत्साह के बीच भाजपा के लिए कुछ देर के लिए तनाव का माहौल भी बन गया। वह भी उसके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ पटना साहिब सीट पर।
शुरुआती राउंड में कांग्रेस ने दी कड़ी टक्कर
पटना साहिब सीट पर इस बार भाजपा ने सात बार के विधायक नंदकिशोर यादव को टिकट नहीं देकर युवा चेहरा रत्नेश कुमार पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने शशांत शेखर को मैदान में उतारा। शुरुआती दो राउंड में स्थिति भाजपा के लिए चौंकाने वाली रही शशांत शेखर 5,000 से अधिक वोटों की बढ़त लेकर आगे निकल गए।
तीसरे राउंड में रत्नेश ने वापसी की कोशिश शुरू की, लेकिन बढ़त अब भी कांग्रेस के पास करीब 3,000 वोट बनी रही। लगातार कई राउंड तक BJP पिछड़ती रही और यह सीट पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई।
नौवें राउंड में बनी BJP की बढ़त
आठ राउंड तक पीछे रहने के बाद नौवें राउंड में रत्नेश कुमार पहली बार आगे निकल गए। इसके बाद बढ़त लगातार बढ़ती चली गई। दस राउंड की गिनती पूरी होने तक रत्नेश 12,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। यहां कुल 30 राउंड की काउंटिंग होनी है।
पटना साहिब: BJP का ऐतिहासिक गढ़
पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। इससे पहले यह पटना पूर्वी सीट थी, जहां 1995 से नंदकिशोर यादव का लगभग एकछत्र कब्जा रहा। भाजपा ने अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में भी यह सीट कभी नहीं हारी। जनसंघ के समय से यह सीट भगवा दल का मजबूत आधार रही है।
– 1967 और 1969 में जनसंघ के रामदेव महतो ने जीत दर्ज की
– 1977 में रामदेव महतो जनता पार्टी के टिकट पर फिर जीते
इस लंबे इतिहास को देखते हुए भाजपा के लिए यहां जीत सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि प्रतिष्ठा का मसला भी है। शुरुआती झटकों के बावजूद रत्नेश की वापसी अब भाजपा को राहत दे रही है।
काउंटिंग जारी है और अंतिम नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन रुझान बता रहे हैं कि पटना साहिब पर BJP एक बार फिर अपना परंपरागत किला बचाती दिख रही है।





















