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Thursday, January 15, 2026
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तुलसी विवाह पर 5 दीपक क्यों जलाए जाते हैं? जानें नियम और खास मंत्र

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कार्तिक शुक्ल द्वादशी के दिन तुलसी विवाह मनाया जाता है। इस दिन माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से किया जाता है। इसे शुभ आरंभ का प्रतीक माना गया है क्योंकि इसके साथ ही सभी मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। घर में तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है इसलिए इस दिन की पूजा घर में सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। इस दिन तुलसी के पास दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ बताया गया है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह के दिन 5 दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है। ये पांच दीपक पंचतत्वों पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश का प्रतीक माने जाते हैं। माना जाता है कि जब इन तत्वों का संतुलन होता है तब घर में भाग्य और सुख शांति का वास होता है। श्रद्धा अनुसार 11 21 51 या 108 दीपक भी जलाए जा सकते हैं। कई परिवार इस दिन दीपदान को पुण्य का कार्य मानते हैं।

दीपक जलाते समय मंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन ॐ तुलस्यै नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए दीप जलाने से पुण्य और बढ़ जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि मंत्र और दीप का मेल साधक के मन को शुद्ध करता है और घर में पवित्रता बढ़ाता है। इससे मन की चिंताएं कम होती हैं और विचारों में सकारात्मकता आती है।

पूजा में कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है। तुलसी के पास हमेशा घी या तिल के तेल का दीप ही जलाया जाना चाहिए। सरसों का तेल तुलसी पूजा में निषिद्ध माना गया है। दीपक को तुलसी के आगे रखना चाहिए पीछे या बाईं ओर नहीं। दीपक को सुबह और शाम दोनों समय जलाना शुभ फल देता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी के सम्मुख जलता दीप घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।

तुलसी विवाह के दिन घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक जरूर जलाना चाहिए। इसे लक्ष्मी स्वागत दीप कहा गया है। मान्यता है कि इस दीप से घर में धन वैभव और उन्नति का मार्ग खुलता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो या मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल रहा हो वे इस दिन विशेष रूप से तुलसी विवाह में भाग लें। सच्चे मन से प्रार्थना करने पर शुभ फल की प्राप्ति अवश्य होती है।

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