मध्य प्रदेश के इंदौर में भ्रष्टाचार में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले 15 दिनों में पांचवीं बार सख्त कदम उठाते हुए कमिश्नर ने दो और अफसरों पर बड़ी कार्रवाई की है।
अनाज कारोबारी को हनीट्रैप में फंसाकर लाखों रुपये वसूलने के मामले में टीआई (इंस्पेक्टर) अजय वर्मा और एएसआई धीरज शर्मा को दोषी पाया गया है। कमिश्नर ने दोनों का डिमोशन कर दिया है। अब टीआई अजय वर्मा को दो साल के लिए सब-इंस्पेक्टर और एएसआई धीरज शर्मा को पांच साल के लिए कॉन्स्टेबल बनाया गया है।
इससे पहले भी कमिश्नर एएसआई रंजना खांडे, एएसआई कलम सिंह, एएसआई रामअवतार दीक्षित और एसआई विकास को बर्खास्त कर चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
- यह मामला साल 2022 का है।
- एमआईजी थाना प्रभारी रहे टीआई अजय वर्मा के पास एक महिला का आवेदन आया जिसमें उसने एक कारोबारी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया।
- जांच करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने आरोपी पक्ष से 20 लाख रुपये लेकर मामला सेट कर दिया।
- इस पूरे प्रकरण में एएसआई धीरज शर्मा और एक कॉन्स्टेबल की भूमिका संदिग्ध मिली।
- बाद में जांच में सामने आया कि कारोबारी को डरा-धमकाकर उससे हर महीने 2 लाख रुपये वसूले जा रहे थे।
- महिला को भी इस हनीट्रैप में शामिल बताया गया है, जिसे कारोबारी से महंगे सामान, फ्लैट और बुटिक खुलवाने तक फायदा मिला।
कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों से यह पूरा रैकेट पकड़ में आ गया।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
10 जनवरी 2025 को भी विजय नगर थाने के टीआई रविंद्र सिंह गुर्जर को तीन साल के लिए सब-इंस्पेक्टर बना दिया गया था। उस पर आरोप था कि उसने अपने स्टाफ के साथ ऑनलाइन सट्टे में पकड़े गए युवकों को पैसे लेकर छोड़ दिया था।




















