Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राज्य की सियासत पूरी तरह गर्म हो गई है। चुनाव आयोग ने 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान कराने की घोषणा की है, जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी। इस ऐलान के तुरंत बाद जनता दल (यूनाइटेड) में भी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में पार्टी के शीर्ष नेताओं की एक अहम रणनीतिक बैठक बुलाई है।
नीतीश ने बुलाई पार्टी की कोर टीम की बैठक
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस बैठक में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक में सीट बंटवारे के फॉर्मूले, चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
एनडीए में अभी तक सीटों के बंटवारे की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में जदयू की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में जदयू अपना सीट शेयरिंग प्रस्ताव तय कर सकता है, जिसे जल्द ही एनडीए गठबंधन के बाकी दलों को सौंपा जाएगा।
NDA में सीट बंटवारे पर सस्पेंस बरकरार
पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में जदयू ने 115 सीटों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दल 100 से 105 सीटों के फॉर्मूले पर सहमत हो सकते हैं। हालांकि अभी इस पर किसी भी दल की ओर से आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कुछ दिन पहले कहा था कि एनडीए में सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन चुकी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी
बैठक में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संभावित प्रत्याशियों के नामों पर भी अंतिम फैसला ले सकते हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, नीतीश इस बार युवा चेहरों को ज्यादा मौका देना चाहते हैं ताकि चुनाव में एक नई ऊर्जा लाई जा सके।
वहीं दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने पहले ही कुछ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पीके ने कहा है कि पार्टी की पूरी लिस्ट 9 अक्टूबर को जारी की जाएगी और इसमें उनका खुद का नाम भी शामिल होगा। हालांकि वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, इसका खुलासा अभी बाकी है।
जदयू के सामने डबल चैलेंज
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार जदयू को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। पहला एनडीए में सीट बंटवारे का संतुलन बनाए रखना और दूसरा राजनीतिक छवि को फिर से लोगों के बीच ताज़ा करना, ताकि मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ बरकरार रहे।
नीतीश कुमार की छवि एक विकासवादी नेता के रूप में रही है लेकिन नए समीकरणों में पार्टी को BJP और RJD दोनों से रणनीतिक चुनौती मिल सकती है।

















