पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि भागीरथपुरा सहित इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पेयजल से 27 लोगों की मौत कोई प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की राजनीतिक संवेदनहीनता और प्रशासनिक नाकामी का सीधा परिणाम है।
सरकार एक ओर जनता को ज़हर मिला पानी पिलाती है और दूसरी ओर डायरिया से हुई मौतों को नकारने, आंकड़े छुपाने और जिम्मेदारी से भागने में जुटी है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खुला अपराध है। सरकार सच को दबाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर डाक्टरों पर झूठी रिपोर्ट बनाने का दबाव बना रही है।
वर्मा ने कहा कि जब अख़बारों में मौतों की पुष्टि हो रही है, अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं, तब भी भाजपा सरकार का यह कहना कि “दूषित पानी से मौत नहीं हुई”—सच पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश है। वर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा कि भाजपा शासन में 2 लाख का मुआवजा या इंसानी जान की नीलामी हो रही है?
पूर्व मंत्री ने मुआवजे की घोषणा पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकारी लापरवाही से हुई मौत पर भाजपा सरकार ने इंसानी जान की कीमत सिर्फ 2 लाख रुपए लगा दी है। भागीरथपुरा में चार बच्चियों के पिता की मौत हो गई। परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया और सरकार समझती है कि 2 लाख में सब खत्म?”
वाहन दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को 25 से 50 लाख मुआवजा मिलता है। उन्होंने कहा कि यही सरकार बेलेश्वर बावड़ी हादसे में 7 लाख, बड़ा गणपति ट्रक हादसे में 5 लाख का मुआवजा देती है, लेकिन अपनी भ्रष्ट, लचर और निकम्मी व्यवस्था से हुई मौतों पर सिर्फ 2 लाख। यह साफ दिखाता है कि भाजपा सरकार के लिए जनता की जान सबसे सस्ती है। दोष पानी का नहीं, सरकार का है।
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइन लीकेज ठीक किए जाते, जल की जांच होती, प्रशासन जागता तो 27 घरों के चूल्हे आज न बुझते। उन्होंने निम्नलिखित मांगें सरकार की-
- दूषित पेयजल से हुई सभी मौतों की न्यायिक जांच हो।
- जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
- मृतकों के परिजनों को कम से कम 1करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए।
- प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध जल की स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत की जाए।
अंत में वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार अगर आज भी सच स्वीकार नहीं करेगी, तो यह साबित हो जाएगा कि यह सरकार जनता की नहीं, मौतों को ढकने वाली सरकार है।”





















