उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 शुरू होने से पहले ही श्रद्धालुओं का उत्साह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 16 मार्च तक कुल 6,17,853 श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
अप्रैल में खुलेंगे चारों धाम के कपाट
चारधाम यात्रा इस बार अप्रैल के तीसरे सप्ताह से शुरू होगी। श्री यमुनोत्री और श्री गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे। इसके बाद श्री केदारनाथ धाम 22 अप्रैल और श्री बदरीनाथ धाम 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
आंकड़े में केदारनाथ आगे
6 मार्च से 16 मार्च के बीच पंजीकरण के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं।
- केदारनाथ: 2,06,622
- बदरीनाथ: 1,82,212
- गंगोत्री: 1,15,763
- यमुनोत्री: 1,13,256
कुल पंजीकरण 6,17,853 तक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। चारधाम के कपाट बंद रहने के बावजूद श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।
शीतकालीन यात्रा 2025-26 में 16 मार्च तक 51 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। बदरीनाथ के शीतकालीन स्थल और जोशीमठ में 20,054 तथा उखीमठ में केदारनाथ की गद्दी स्थल पर 31,736 श्रद्धालु पहुंचे।
121 करोड़ से अधिक का बजट
बीकेटीसी ने यात्रा वर्ष 2026-27 के लिए 121 करोड़ रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया है।
- बदरीनाथ धाम: 57.47 करोड़ रुपये
- केदारनाथ धाम: 63.60 करोड़ रुपये
समिति के अनुसार धामों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस यात्रा वर्ष श्रद्धालुओं के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।
गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। धाम परिसर में मोबाइल फोन, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा।
इसके अलावा तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष की स्थापना, ऋषिकेश में ट्रांजिट कैंप और ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने जैसे कदम भी शामिल हैं।
सुविधाओं पर खास जोर
मंदिर परिसर में रेलिंग, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और विश्राम गृहों की व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी तैयारियां कपाट खुलने से पहले पूरी कर ली जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
















