ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के फैसले के बाद वैश्विक तनाव बढ़ गया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से अपील की है कि वे इस जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए संयुक्त कार्रवाई करें।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के लिए यह मार्ग उतना महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि वह यहां से बहुत कम तेल आयात करता है, लेकिन चीन और कई अन्य देशों के लिए यह मार्ग बेहद जरूरी है।
ट्रंप ने किन देशों से की अपील
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों को इस संकट के समाधान में आगे आना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ये देश अमेरिका के साथ मिलकर इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजेंगे ताकि समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
सैन्य कार्रवाई की भी चेतावनी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत पहले से ही इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे ईरानी पोतों को निशाना बनाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने पहले ही ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान के लिए ड्रोन, बारूदी सुरंग या छोटी दूरी की मिसाइलों से समुद्री मार्ग को बाधित करना अब भी संभव है।
तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका की निर्भरता इस पर काफी कम है।
ट्रंप की अपील के बावजूद अब तक कई देशों ने स्पष्ट रूप से युद्धपोत भेजने की सहमति नहीं दी है। ऑस्ट्रेलिया ने इस क्षेत्र में अपने नौसैनिक पोत भेजने से इनकार कर दिया है। वहीं जापान ने भी कहा है कि फिलहाल उसने युद्धपोत तैनात करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
कुछ देश कर रहे विचार
दक्षिण कोरिया ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। हालांकि किसी भी कदम से पहले विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि चीन इस प्रयास में सहयोग नहीं करता है तो वह अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा को टाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चीन को इस मामले में मदद करनी चाहिए क्योंकि इस समुद्री मार्ग से उसे बड़ी मात्रा में तेल मिलता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके असर को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
















