22.1 C
Indore
Tuesday, March 17, 2026
Homeबड़ी खबरराज्यसभा में TMC का वॉकआउट, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को हटाने पर...

राज्यसभा में TMC का वॉकआउट, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को हटाने पर जताया विरोध

Date:

राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने निर्वाचन आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के शीर्ष अधिकारियों को पद से हटाए जाने के विरोध में सदन से वॉकआउट किया। यह मुद्दा शून्यकाल के दौरान उठाया गया।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने देर रात राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को उनके पदों से हटा दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस निर्णय का विरोध करती है और इसी के विरोध में दिन भर के लिए सदन से बहिर्गमन कर रही है।

सरकार का जवाब

इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके निर्णयों से केंद्र सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि संविधान के तहत आयोग को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार है और ऐसे मुद्दों को संसद में उठाना सदन के समय का दुरुपयोग है।

किरण रिजिजू ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस जैसे दल अक्सर संवैधानिक निकायों पर सवाल उठाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र के भीतर लिया गया है।

पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद निर्वाचन आयोग ने राज्य के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया था।

इसमें राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना शामिल हैं। आयोग ने नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव संबंधी कार्यों से दूर रखने का निर्णय लिया।

नए अधिकारियों की नियुक्ति

निर्वाचन आयोग ने 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है।

इसके अलावा 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।

चुनाव तक नहीं मिलेंगे चुनावी दायित्व

आयोग की ओर से जारी पत्र के अनुसार जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक किसी भी चुनाव से जुड़े पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा।

आयोग ने यह फैसला राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया है और राज्य सरकार से निर्देशों का तत्काल पालन करने को कहा है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना चार मई को की जाएगी।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश