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Thursday, January 15, 2026
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संचार साथी ऐप पर बढ़ा विवाद, सरकार ने कहा- ऐप जरूरी नहीं है यूजर चाहें तो डिलीट कर दें

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संचार साथी ऐप को लेकर विवाद बढ़ रहा है और इसी बीच सरकार ने एक बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि यह ऐप किसी के लिए भी अनिवार्य नहीं है। यूजर चाहें तो इसे अपने फोन में रख सकते हैं और चाहें तो तुरंत डिलीट भी कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि इस ऐप के आधार पर न कोई जासूसी होती है और न ही कॉल सुनने जैसी कोई प्रक्रिया चलती है। उन्होंने कहा कि यह ऐप केवल सुरक्षा के लिए बनाया गया है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह से यूजर की मर्जी पर निर्भर है।

सिंधिया ने कहा कि अगर कोई ऐप को इस्तेमाल नहीं करना चाहता तो वह इसे एक्टिवेट न करे। उन्होंने कहा कि फोन में रखना जरूरी नहीं है और इसे कभी भी हटाया जा सकता है। उनका कहना है कि संचार साथी का मकसद लोगों को ठगी और चोरी से बचाने में मदद करना है। कई लोगों को यह नहीं पता कि यह ऐप किस तरह सुरक्षा में मदद करता है इसलिए सरकार इसे लोगों तक पहुंचा रही है। उन्होंने दोहराया कि अगर यूजर इसे हटाना चाहते हैं तो वह तुरंत डिलीट कर सकते हैं।

उन्होंने विपक्ष पर भी हमला किया। सिंधिया ने कहा कि जब विपक्ष के पास मुद्दा नहीं होता तो वह किसी भी चीज़ में विवाद ढूंढने लगता है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उपभोक्ताओं की सुरक्षा का ध्यान रखे। संचार साथी एक पोर्टल है जो लोगों को उनके फोन की असलियत पहचानने में मदद करता है। इसके ज़रिए यूजर यह पता कर सकता है कि फोन का IMEI नंबर सही है या नकली है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान से बड़ी संख्या में फर्जी कनेक्शन पकड़े गए हैं। करीब दो करोड़ से ज्यादा नकली मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं। लगभग 20 लाख चोरी हुए फोन ट्रेस किए गए हैं। इनमें से कई फोन वापस उनके असली मालिकों को लौटाए गए हैं। लगभग 21 लाख मोबाइल फोन केवल यूजर की रिपोर्टिंग के आधार पर ही ब्लॉक किए गए हैं। सिंधिया के अनुसार यह सफलता लोगों की भागीदारी से मिली है क्योंकि नागरिक खुद इस मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं।

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