उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत चल रहे विकास कार्यों को लेकर गुरुवार को बड़ा विरोध देखने को मिला। सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में आ रहे करीब 400 मकानों को लेकर पिपली नाका और भैरवगढ़ इलाके के सैकड़ों रहवासियों ने प्रदर्शन किया।
लोगों ने स्थानीय विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के कार्यालय का घेराव कर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे भी मौजूद रहे और उन्होंने अपने घरों को बचाने की मांग की।
घर टूटने के डर से भावुक हुए लोग
प्रदर्शन के दौरान कई महिलाएं अपने घर टूटने की आशंका से रोती-बिलखती नजर आईं। स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने वोट देकर अपने प्रतिनिधि को चुना था, लेकिन अब उन्हीं के घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है।
रहवासियों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण के कारण कई मकानों का 10 से 20 फीट तक हिस्सा प्रभावित हो रहा है। इससे कई परिवारों की छत और रोजी-रोटी दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।
सिंहस्थ 2028 के लिए चल रहे विकास कार्य
मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में कई बड़े विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें सड़क चौड़ीकरण, रोपवे और पुल निर्माण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
इसी क्रम में पिपली नाका से भैरवगढ़ तक सड़क चौड़ीकरण के लिए नगर निगम की टीम ने कई मकानों पर निशान लगा दिए हैं। इसके विरोध में सैकड़ों लोग आगर रोड स्थित विधायक कार्यालय पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया।
विधायक ने कलेक्टर से की चर्चा
विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बाद उज्जैन कलेक्टर रौशन सिंह से फोन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को कलेक्टर से मिलवाया जाएगा और समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
इसके बाद भी विरोध थमा नहीं। बड़ी संख्या में रहवासी भाजपा कार्यालय पहुंच गए और सड़क पर बैठकर धरना देने लगे। करीब एक घंटे तक कार्यालय के बाहर हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
छह लेन की जगह चार लेन सड़क की मांग
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने छह लेन सड़क के प्रस्ताव का विरोध किया और इसे चार लेन तक सीमित करने की मांग की। उनका कहना है कि सड़क पहले से ही पर्याप्त चौड़ी है और चौड़ाई कम करने से कई मकानों को टूटने से बचाया जा सकता है।
नगर निगम ने मंगलवार को पिपली नाका से गढ़कालिका मंदिर, ओखलेश्वर श्मशान और भैरवगढ़ जेल चौराहा तक के भवन मालिकों को नोटिस जारी किए थे। नोटिस में प्रभावित हिस्सों को सात दिन के भीतर खाली करने को कहा गया है।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार पहले सड़क को 150 फीट चौड़ा करने का प्रस्ताव था, जिसे बाद में घटाकर 100 फीट कर दिया गया। वहीं स्थानीय लोग इसे 80 फीट तक सीमित रखने की मांग कर रहे हैं।



















