उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा (Suheldev Bharatiya Samaj Party) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) को लेकर बड़ा दावा किया है। सोमवार को उन्होंने कहा कि इस बार बिहार में एनडीए सत्ता से बाहर हो जाएगा और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की सरकार बनने जा रही है।
राजभर ने कहा कि बिहार में जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है, तब राजद की सरकार बनी है। इस बार भी पहले चरण में 60 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई है, इसलिए उनके मुताबिक इस बार सत्ता परिवर्तन लगभग तय है।
राजभर बोले – ज्यादा वोटिंग का मतलब सत्ता बदलना
राजभर ने अपने दावे का आधार पुराने चुनाव आंकड़ों को बताया। उन्होंने कहा, “मैंने गूगल पर देखा कि जब भी बिहार में ज्यादा वोटिंग हुई है, तब राजद की सरकार बनी है।”
उन्होंने कहा कि इस बार भी लोगों ने चुपचाप वोट दिया है और जनता का मूड कोई नहीं समझ पा रहा है। “नेता बोल रहे हैं, लेकिन जनता खामोश है। जब जनता चुप होती है, तब बड़ा बदलाव होता है।”
ओवैसी और प्रशांत किशोर पर भी बोले राजभर
ओपी राजभर ने कहा कि इस चुनाव में ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जनसुराज पार्टी भी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। उन्होंने कहा कि “ओवैसी राजद के खिलाफ लड़ रहे हैं, पीके सभी के खिलाफ हैं। ऐसे में वहां बहुत घाचपेच है। मगर ज्यादा मतदान यह बताता है कि जनता बदलाव चाहती है।”
पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान
बिहार में दो चरणों में वोटिंग हो रही है। पहले चरण में लगभग 65 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है, जो राज्य के चुनाव इतिहास में सबसे ज्यादा है। दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ज्यादा मतदान आमतौर पर सत्ता के खिलाफ जाता है और यही कारण है कि राजभर को लग रहा है कि इस बार भी परिणाम एनडीए के पक्ष में नहीं होंगे।
पुराने चुनावों का पैटर्न
राजभर के दावे को अगर पिछली चुनावी तस्वीरों से जोड़ें तो आंकड़े कुछ हद तक उनके पक्ष में दिखते हैं। 1990 में जब लालू प्रसाद यादव पहली बार सत्ता में आए थे, तब मतदान 62.04% था। 1995 में 61.79% वोटिंग के साथ राजद की सत्ता कायम रही और 2000 में 62.57% वोटिंग के बाद लालू की सत्ता में वापसी हुई।
अब 2025 के चुनाव में भी पहले चरण की वोटिंग 60% से ज्यादा है, जिससे सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या इतिहास खुद को दोहराएगा।
अब नजर 11 नवंबर की वोटिंग पर
पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और अब दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। राजनीतिक समीक्षक मानते हैं कि इस बार मतदान के रुझान सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर नतीजों के बाद ही साफ होगी।





















