Diwali Ram Mandir Special: दिवाली सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का पर्व है। इस दिन देशभर के राम मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। अगर आप भी इस दिवाली प्रभु श्रीराम के दर्शन करना चाहते हैं, तो जानिए देश के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में जहां दिवाली मनाना बन जाएगा जीवन का यादगार पल।
1. अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर
अयोध्या को श्रीराम की जन्मस्थली कहा जाता है और दिवाली का असली अर्थ यहीं से शुरू होता है। कहते हैं रावण वध के बाद जब प्रभु श्रीराम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे तो नगरवासियों ने पूरी नगरी को दीपों से सजा दिया। आज भी हर साल लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर दीपोत्सव मनाते हैं। पूरा शहर लाखों दीयों से जगमगा उठता है।
2. राम राजा मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राम राजा मंदिर की पहचान भारत के एकमात्र ऐसे मंदिर के रूप में होती है, जहां भगवान श्रीराम को “राजा” के रूप में पूजा जाता है। यहां रोजाना गार्ड ऑफ ऑनर और शस्त्र सलामी दी जाती है। कहते हैं कि यहां स्थापित मूर्ति को किसी और स्थान पर ले जाने की कोशिश की गई थी, लेकिन मूर्ति ने खुद वहीं रहने का संकेत दिया। दिवाली के समय यह मंदिर स्वर्ण और दीपों से सजाया जाता है।
3. कलाराम मंदिर, नासिक
महाराष्ट्र के नासिक में पंचवटी क्षेत्र में स्थित कलाराम मंदिर भगवान श्रीराम की वनवास यात्रा से जुड़ा हुआ है। कहते हैं कि सरदार रंगाराव ओधेकर ने एक सपना देखा था, जिसमें उन्हें प्रभु श्रीराम की काली मूर्ति गोदावरी नदी से निकालने का संकेत मिला। बाद में वही मूर्ति इस मंदिर में स्थापित की गई, जिससे इसका नाम पड़ा ‘कलाराम’। दिवाली के मौके पर यहां दीपों की जगमगाहट अद्भुत होती है।
4. रामास्वामी मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु का रामास्वामी मंदिर दक्षिण भारत की “अयोध्या” कहा जाता है। यह मंदिर वास्तुकला और भव्यता का अद्भुत उदाहरण है। यहां श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न सभी की मूर्तियां एक साथ विराजमान हैं। दिवाली के दौरान मंदिर रंग-बिरंगी रोशनियों और फूलों से सजा रहता है, और श्रीराम के जयकारों से वातावरण गूंजता है।
5. त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर, केरल
केरल के त्रिशूर जिले में स्थित त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर की मान्यता है कि यहां स्थापित श्रीराम की मूर्ति स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने स्थापित की थी। दिवाली पर यहां विशेष पूजा और दीपोत्सव का आयोजन होता है। कहा जाता है कि जो भक्त यहां श्रद्धा से दर्शन करता है, उसे बुरी शक्तियों और नजर दोष से मुक्ति मिलती है।





















