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Tuesday, February 10, 2026
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महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर ‘हल्दी खेला’ को लेकर विवाद, मंदिर समिति ले सकती है बड़ा फैसला

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि से पहले ‘हल्दी खेला’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर परिसर में महिलाओं द्वारा एक-दूसरे को हल्दी लगाकर नाच-गाने पर पुजारियों ने आपत्ति जताई है और इसे सनातन परंपरा के विपरीत बताया है।

पुजारियों का कहना है कि शिव नवरात्रि में पूजा, आराधना और संकल्प की परंपरा है, जिसकी शुरुआत पंचमी से होती है। उनके अनुसार शिव पुराण और अन्य शास्त्रों में महाशिवरात्रि पर शिव विवाह को इस तरह उत्सव के रूप में मनाने या हल्दी खेलने का कोई उल्लेख नहीं मिलता। ऐसे में मंदिर परिसर में इस तरह की गतिविधियां धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि हल्दी खेलने की परंपरा भविष्य में घातक रूप भी ले सकती है। इसलिए समय रहते इस पर रोक लगाना जरूरी है। उन्होंने मंदिर समिति से मांग की है कि इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।

11 वर्षों से खेली जा रही है हल्दी खेला

उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व की शुरुआत के साथ मान्यता है कि भगवान महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है और महाशिव नवरात्रि के नौ दिनों तक उनका विशेष शृंगार होता है। रोज सुबह मंदिर परिसर में कोटेश्वर भगवान का पूजन-अर्चन किया जाता है। इसी क्रम में पिछले करीब 11 वर्षों से कुछ महिलाएं इसे शिव विवाह के उत्सव के रूप में मनाते हुए हल्दी खेलती आ रही हैं।

पुजारियों का कहना है कि भगवान कोटेश्वर को उबटन अर्पित करने की परंपरा अलग है, लेकिन इसे आपसी हल्दी लगाने और नाच-गाने के रूप में बदल देना सही नहीं है। उनका आरोप है कि धार्मिक परंपरा को मजाक और उत्सव में बदल दिया गया है, जो शास्त्रसम्मत नहीं है।

मंदिर प्रशासन को भी इस संबंध में शिकायतें मिली हैं। महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक का कहना है कि अन्य पुजारियों से चर्चा कर इस पर विचार किया जाएगा और जो भी उचित निर्णय होगा, वह लिया जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया जा सकता है।

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